Ghazal Mirza Javed Baig
मिर्ज़ा जावेद बेग

इतनी बुलंद – गज़ल, मिर्ज़ा जावेद बेग

पेश है मिर्ज़ा जावेद बेग साहिब की ग़ज़ल- “इतनी बुलंद ओ बाला तू अपनी मजाल कर” इतनी बुलंद ओ बाला तू अपनी मजाल कर मुंह ज़ोर आँधियों की ये हस्ती निढ़ाल कर ज़ुल्मत मिटा जहान से अजदाद की तरह फिर से शुजाअतों की तू क़ायम मिसाल कर ख़ुशबू से जिसकी महके वतन की गली गली …

OBO Live Tarahi-100 Santosh Khirwadkar
संतोष खिरवडकर

OBO Live Tarahi-100/Santosh Khirwadkar

गज़ल गो के OBO Live Tarahi-100 में पेश है संतोष खिरवडकर जी की ग़ज़ल- कोई आकर सिखा गया है मुझे कोई आकर सिखा गया है मुझे ज़िन्दगी जीना आ गया है मुझे मेरी क़िस्मत कि अपनी महफ़िल में ख़ुद वो आकर बुला गया है मुझे पास आकर कोई इशारों में राज़-ए-उल्फ़त बता गया है मुझे …

राणा प्रताप सिंह

OBO Live Tarahi-100/Rana Pratap Singh

OBO Live Tarahi-100/Rana Pratap Singh OBO Live Tarahi-100 में पेश है ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम के प्रबंधन सदस्य श्री राणा प्रताप सिंह जी की ग़ज़ल राज़-ए-उलफ़त बता गया है मुझे। ओबीओ लाइव तरही मुशायरे को लगातार आठ वर्षों तक संचालित करने और 100 सफल अंकों तक लाने का श्रेय आयोजन के संचालक श्री राणा …

OBO Tarahi 100/Dinesh Kumar
दिनेश कुमार बंसल

OBO Live Tarahi-100/Dinesh Kumar

OBO Live Tarahi-100/Dinesh Kumar OBO Live Tarahi-100/Dinesh Kumar में पढ़िये कैथल, हरियाणा के शाइर दिनेश कुमार बंसल की ग़ज़ल। दिनेश कुमार बंसल प्रतिभाशाली ग़ज़लकार हैं, उनकी ग़ज़लों में शिल्प की कसावट तो है ही कहन में भी गहराई है। पेश है- आसमाँ से गिरा गया है मुझे आसमाँ से गिरा गया है मुझे मेरा अभिमान …

Saman Kabeer
समर कबीर

OBO Live Tarahi-100/Samar Kabeer

OBO Live Tarahi-100/Samar Kabeer OBO Live Tarahi-100 शीर्षक से पोस्ट होने वाली गज़लें ओबीओ डॉट कॉम से ली गई हैं। पिछले आठ वर्षों से अधिक समय से ओपन बुक्स ऑनलाइन द्वारा अनवरत आयोजित किया जाना वाला ओबीओ लाइव तरही मुशायरा हाल ही में अपने आयोजन के सौ अंक पूरे कर चुका है। इंटरनेट पर शायद …

jheel aankhon aaina roshan ravi shukla
रवि शुक्ल

झील सी आँखों में कोई आइना रोशन करें – रवि शुक्ल

झील सी आँखों में कोई आइना रोशन करें यानी इक हैरानियों का सिलसिला रोशन करें दश्त की तन्हाइयों में हैं अगर तारीक़ियाँ बात करने के लिए इक तज़किरा रोशन करें पत्थरों ने कब किये हैं हल मसाइल क़ौम के आओ मिलकर अम्न की हम इक दुआ रोशन करें हो गए गर दूर रिश्ते कल तलक …

डॉ मंजु कछावा 'अना'

तेरी ज़िद दुरुस्त भी है मगर – डॉ. मंजु कछावा ‘अना’

तेरी ज़िद दुरुस्त भी है मगर मेरा अपना भी तो उसूल है जो तेरी निगाह में अहम है वो मेरी नज़र में फ़ुज़ूल है कोई वाक़या किसी फूल का न सुनाओ अहले चमन मुझे मेरी आँख आज है शबनमी मेरा दिल भी आज मलूल है तू दयार ए ग़म में धकेल दे,या मसर्रतों का जहान …

मुन्तज़िर फ़िरोज़ाबादी

जौन एलिया: एक अजब गजब शाइर – मुन्तज़िर फ़िरोज़ाबादी

जौन एलिया: एक अजब गजब शाइर जौन एक मुँहफट, बेबाक और बागी शायर थे। आप जौन को जितना पढ़ेंगे उतना जौन खुलते आएँगे। कुछ दिन में आप इस जौन वाइरस से एडिक्टड हो जाएँगे और एक तिश्नग़ी आपका शिकार करने लगेगी। नए शायरों की ग़ज़लें भी अब मीर, मोमिन, ग़ालिब, फ़ैज़, ख़ुमार के आगोश से …

निलेश 'नूर'

सीने से चिमटा कर रोये – निलेश नूर

सीने से चिमटा कर रोये आदरणीय निलेश “नूर” जी की इस ग़ज़ल के शिल्प पर उस्ताद और वरिष्ठ ग़ज़लकारों नें विस्तार से अपनी बात कही है। उनके अपने तर्क हैं निलेश नूर साहिब के अपने। यदि ग़ज़ल में आप कोई प्रयोग करते हैं तो आपके पास तर्क भी होने चाहिए। मैं निजी तौर पर श्री …

Ghazal, Subhash Pathak, Zia
सुभाष पाठक 'ज़िया'

ये जो आँखों से अश्कबारी है – सुभाष पाठक ‘ज़िया’

ये जो आँखों से अश्कबारी है युवा शाइर सुभाष पाठक ‘ज़िया’ की ग़ज़लें मैं सोशल मीडिया में लगातार पढ़ता रहता हूँ। वह युवा और संयत शाइर हैं जो आभासी दुनिया के साथ-साथ वास्तविक अदब की दुनिया में लगातार सक्रिय हैं। सुभाष पाठक जी की ग़ज़लों को उनके पाठकों की मुहब्बत हासिल है। उनके फ़िक्रो फ़न …