OBO Live Tarahi-100/Mahendra Kumar
महेन्द्र कुमार

OBO Live Tarahi-100/Mahendra Kumar

बोलना जब से आ गया है मुझे OBO Live Tarahi-100 में पेश है महेन्द्र कुमार की ग़ज़ल जो उन्होंने ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम में आयोजित लाइव तरही मुशायरे के 100 वें अंक में प्रस्तुत की थी। बोलना जब से आ गया है मुझे चुप रहूँ ये कहा गया है मुझे मेरी सूरत बिगाड़ने वाला …

ghazal surlhab bashar
सुरख़ाब बशर

दिल से निकली ज़ुबान तक पहुँची – सुरख़ाब बशर

दिल से निकली ज़ुबान तक पहुँची पेश है सुरख़ाब बशर की एक ग़ज़ल दिल से निकली ज़ुबान तक पहुँची इक सदा आसमान तक पहुँची उस बुलंदी पे दिल को यूँ तोड़ा बात सारे जहान तक पहुँची उन के लब याद आ गए मुझको जब नज़र पान दान तक पहुँची ये मुहब्बत की कामयाबी है आशिक़ी …

ghazal Farmood Allahabadi
फ़रमूद इलाहाबादी

नहीं निगाह में मंज़िल, तो जुस्तजू ही सही – फ़रमूद इलाहाबादी

नहीं निगाह में मंज़िल, तो जुस्तजू ही सही पेश है फरमूद इलाहाबादी जी की एक मिजाहिया ग़ज़ल नहीं निगाह में मंज़िल, तो जुस्तजू ही सही किसी हसीन से “चैटिंग” पे गुफ्तगू ही सही मेरी पसंद तो दरअस्ल है तेरी आपा उसे पसंद नहीं मैं, तो यार तू ही सही अगर मिली न मुझे कोई “इंडियन” …

Pukara hai Humne Giriraj Bhandari
गिरिराज भंडारी

पुकारा है हमने उसे बार-बार – गिरिराज भंडारी

पुकारा है हमने उसे बार-बार पेश है गिरिराज भंडारी जी की एक ग़ज़ल अँधेरों के मित्रों हवा दीजिये जलाता हूँ दिया बुझा दीजिये लिये आइना सबसे मिलता रहा सभी अब मुझे बद्दुआ दीजिये हमारा यकीं चाँद से उठ गया हमें जुगनुओं का पता दीजिये पुकारा है हमने उसे बार-बार न कहना उसे फिर सदा दीजिये …

OBO Live Tarahi 100, Yograj Prabhakar
योगराज प्रभाकर

OBO Live Tarahi-100/Yograj Prabhakar

OBO Live Tarahi-100/Yograj Prabhakar OBO Live Tarahi-100 में पेश है श्री योगराज प्रभाकर जी की एक ग़ज़ल तिश्नगी से मिला गया है मुझे। पिछले आठ वर्षों से अधिक समय से ओपन बुक्स ऑनलाइन द्वारा अनवरत आयोजित किया जाना वाला ओबीओ लाइव तरही मुशायरा हाल ही में अपने आयोजन के सौ अंक पूरे कर चुका है। …

ग़ज़ल - संजू शब्दिता
संजू शब्दिता

मज़ा भी ज़िन्दगी का ख़ूब आया – संजू शब्दिता

मज़ा भी ज़िन्दगी का ख़ूब आया पेश है संजू शब्दिता की एक गज़ल मज़ा भी ज़िन्दगी का ख़ूब आया हमें हंसना-हंसाना ख़ूब आया हमारी दस्तरस में था कहाँ वो मगर जब हाथ आया ख़ूब आया हक़ीक़त तो मेरी सहरा है लेकिन मेरे हिस्से में दरिया ख़ूब आया बचा रक्खे थे हमने गम के आँसू हमें …

ग़ज़ल - राज़िक़ अंसारी
राज़िक अंसारी

आतिश ए ग़म से गुज़रता रोज़ हूँ – राज़िक़ अंसारी

आतिश ए ग़म से गुज़रता रोज़ हूँ पेश है राज़िक अंसारी जी की ग़ज़ल आतिश ए ग़म से गुज़रता रोज़ हूँ रोज़ मैं जीता हूँ , मरता रोज़ हूँ जाने कब आवाज़ दे कर रोक ले उस के कूचे में ठहरता रोज़ हूँ एक दिन हो जाऊंगा मिट्टी का ढेर थोड़ा थोड़ा सा बिखरता रोज़ …

Ghazal Mirza Javed Baig
मिर्ज़ा जावेद बेग

इतनी बुलंद – गज़ल, मिर्ज़ा जावेद बेग

पेश है मिर्ज़ा जावेद बेग साहिब की ग़ज़ल- “इतनी बुलंद ओ बाला तू अपनी मजाल कर” इतनी बुलंद ओ बाला तू अपनी मजाल कर मुंह ज़ोर आँधियों की ये हस्ती निढ़ाल कर ज़ुल्मत मिटा जहान से अजदाद की तरह फिर से शुजाअतों की तू क़ायम मिसाल कर ख़ुशबू से जिसकी महके वतन की गली गली …

OBO Live Tarahi-100 Santosh Khirwadkar
संतोष खिरवडकर

OBO Live Tarahi-100/Santosh Khirwadkar

गज़ल गो के OBO Live Tarahi-100 में पेश है संतोष खिरवडकर जी की ग़ज़ल- कोई आकर सिखा गया है मुझे कोई आकर सिखा गया है मुझे ज़िन्दगी जीना आ गया है मुझे मेरी क़िस्मत कि अपनी महफ़िल में ख़ुद वो आकर बुला गया है मुझे पास आकर कोई इशारों में राज़-ए-उल्फ़त बता गया है मुझे …

राणा प्रताप सिंह

OBO Live Tarahi-100/Rana Pratap Singh

OBO Live Tarahi-100/Rana Pratap Singh OBO Live Tarahi-100 में पेश है ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम के प्रबंधन सदस्य श्री राणा प्रताप सिंह जी की ग़ज़ल राज़-ए-उलफ़त बता गया है मुझे। ओबीओ लाइव तरही मुशायरे को लगातार आठ वर्षों तक संचालित करने और 100 सफल अंकों तक लाने का श्रेय आयोजन के संचालक श्री राणा …