- राज़िक अंसारी

आंखों की वीरानी पढ़ कर देखो ना- राज़िक अंसारी

इंदौर के रहने वाले वरिष्ठ शायर मोहतरम राज़िक अंसारी जी उर्दू गज़लों में अच्छा खासा दख्ल रखते हैं, वे वर्षों से विभिन्न मंचों पर सक्रिय हैं। उनकी गज़लों को रेख्ता डॉट ओआरजी जैसे प्रतिष्ठित साइट में जगह मिली है। वे बदलते दौर के साथ अपनी ग़ज़लों को लेकर चले हैं, जो यह साबित करने के लिए काफी है कि मोहतरम राज़िक अंसारी प्रगतिशील विचारधारा के शाइर हैं।
शिज्जु शकूर

आंखों की वीरानी पढ़ कर देखो ना
क्या क्या टूटा दिल के अंदर देखो ना

लम्हा लम्हा रात कहाँ तक आ पहुंची
खिड़की से कमरे के बाहर देखो ना

क्या होता है दर्द छुपाने का अंजाम
तुम भी अपने आंसू पी कर देखो ना

छोड़ के हमको तुम लोगों ने क्या पाया
सच्चाई से आंख मिला कर देखो ना

शायद मेरे आंसू तुम को रोक सकें
फिर मुझको इक बार पलट कर देखो ना

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