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राजेश कुमारी 'राज'

ओबीओ लाइव तरही-100/ श्रीमती राजेश कुमारी

देहरादून की शायरा श्रीमती राजेश कुमारी ‘राज’ जी ओबीओ की कार्यकारिणी सदस्या हैं। आपने ग़ज़ल के अलावा सनातनी छंद व लघुकथाओं की रचना भी की है। आप विभिन्न मंचों पर लगातार सक्रिय हैं। ओबीओ लाइव तरही 100 में पेश है श्रीमती राजेश कुमारी जी ग़ज़ल-

दिन में तारे दिखा गया है मुझे

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दिन में तारे दिखा गया है मुझे
नींद से वो जगा गया है मुझे

कोयला बन सकी न राख हुई
उसका धोखा जला गया है मुझे

आसमां छीन कर मेरा अपना
इस जमीं पर बिठा गया है मुझे

मैंने इंसा जिसे बनाया था
वो ही पत्थर बना गया है मुझे

करके दरिया को पार इक तिनका
दुनिया दारी सिखा गया है मुझे

जिंदगी का ख़राब इक लम्हा
हाशिये से मिटा गया है मुझे

बिन ख़ता के तेरी अदालत में
जाने क्या-क्या कहा गया है मुझे

ऐब मुझमें हज़ार कह-कह कर
खत्म पल-पल किया गया है मुझे

अब खुशी दे या छीन ले मौला
सब्र करना तो आ गया है मुझे

अब खुशी दे या छीन ले मौला
सब्र करना तो आ गया है मुझे

राजेश कुमारी ‘राज’

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