शिज्जु शकूर

कितने अच्छे थे मेरा ऐब बताने वाले

कितने अच्छे थे मेरा ऐब बताने वाले
वो मेरे दोस्त मुझे राह दिखाने वाले

वक्त ने, काश! उन्हें रुकने दिया होता ज़रा
साथ ही छोड़ गए साथ निभाने वाले

मुफ़लिसी मक्र की छाई है सियाही अब भी
पर बताओ हैं कहाँ शम्अ जलाने वाले

अपने क़ातिल से शिकायत नहीं कोई मुझको
कर गए ग़र्क मेरी कश्ती, बचाने वाले

खूब तासीर नज़र आई मुहब्बत की यूँ
रो पड़े जाँ को मेरी फ़ैज़ उठाने वाले

एकता टूटने पाए न कभी, मसनद पर
आके बैठे हुए हैं हमको लड़ाने वाले

अपना इतिहास बताओ तो सही पहले तुम
दुनिया को देश का इतिहास बताने वाले
Meanings:
ऐब – दोष, मक्र – झूठ, गर्क – डूबना, तासीर – प्रभाव
फ़ैज़ उठाना – लाभ उठाना

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