शिज्जु शकूर

जो तिरंगे में लिपटकर अपने घर लौट आए हैं उन सभी वीरों की रूहें जाविदानी हो गईं

निस्बतें इस दौर में यारो कहानी हो गईं
और बातें भी उसूलों की पुरानी हो गईं

मुफ़लिसी, बदकारियाँ, महँगाई, हिंसा, नफ़रतें
ग़ालिबन अब ये बलाएँ आसमानी हो गईं

दायरा मेरा बहुत छोटा है ये दुनिया बड़ी
मेरी सारी दास्तानें लनतरानी हो गईं

जो तिरंगे में लिपटकर अपने घर लौट आए हैं
उन सभी वीरों की रूहें जाविदानी हो गईं

चाँद गुल बुलबुल ख़त ओ क़ासिद ‘शकूर’
सूरतें ये सब मुहब्बत की पुरानी हो गईं

Meaning:
निस्बत – संबंध, बदकारी – बुरा काम, लनतरानी – शेखी
जाविदानी – दिव्य

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