शिज्जु शकूर

दरिया मेरे क़रीब जो आकर सिमट गया

दरिया मेरे क़रीब जो आकर सिमट गया
तनहा मै अपने आपसे खुद ही लिपट गया

पन्ने कई मरोड़ के फेंके ज़मीन पर
नाक़ामियों से जैसे ये कमरा ही पट गया

जब भी मिले हरीफ़ मुझे अपने ही मिले
दिल से मुहब्बतों का यूँ अहसास घट गया

आरी बहुत ही तेज़ थी लालच की इसलिए
आया जो दरमियान वही पेड़ कट गया

क़ुदरत कहाँ बनाए जगह अपने वास्ते
जंगल तमाम काट के इंसान डट गया

Meaning:
हरीफ़ – दुश्मन

Shijju Shakoor

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