शिज्जु शकूर

दिल ए नाकाम पर हँसी आई

दिल ए नाकाम पर हँसी आई
तेरे इलज़ाम पर हँसी आई

जिस मुहब्बत की आरज़ू थी बहुत
उसकेे अंजाम पर हँसी आई

दास्ताँ अपनी लिखने बैठा था
अपने इस काम पर हँसी आई

जिसमें तुमने कभी रखा था मुझे
आज उस दाम पर हँसी आई

मेरे क़ातिल का तज़किरा जो हुआ
तो हर इक नाम पर हँसी आई।

यक ब यक आके जाँ से लिपटे हुए
सारे आलाम पर हँसी आई

तेरे असरार जब खुले मुझपर
अपने औहाम पर हँसी आई

Meaning:
दाम – जाल, तज़किरा – जिक्र, आलाम – दुःखों,
असरार – राज़, औहाम – वहम का बहुवचन

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