- शिज्जु शकूर

रेत को आब-ए-रवाँ और धूप को झरना लिखा

रेत को आब-ए-रवाँ और धूप को झरना लिखा
बेखुदी में मेरे दिल ने जाने ये क्या-क्या लिखा

मेरे चेहरे पर न जाने क्या दिखा था उसको जो
उसने दिल को मेरे इक टूटा हुआ शीशा लिखा

तू तो सीधी राह पे था टूटके तूफाँ की तरह
नासमझ लोगो ने तेरा हर क़दम उल्टा लिखा

अब मुहब्बत पर अक़ीदत ही नहीं है लोगों को
इसलिए पाक़ीज़गी को ही तेरी धोखा लिखा

बेख़बर हूँ रोज़-ओ-शब की ग़र्दिशों से क्या कहूँ
कब तलक मेरे मुकद्दर में है अँधियारा लिखा

Meaning:
आबे रवाँ – बहता पानी, अक़ीदत – श्रद्धा, रोज़ो शब – रात और दिन
गर्दिश – चक्कर

Shijju Shakoor

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