अय्यूब खान "बिस्मिल"

वफ़ा की उनसे चलो फिर से आरज़ू कर लें – अय्यूब खान “बिस्मिल”

वफ़ा की उनसे चलो फिर से आरज़ू कर लें
यूँ तार तार मुहब्बत की आबरू कर लें

हुआ जो चाक ये दिल क्यूँ न हम रफू कर लें
बुलाओ उनको के फिर उनसे गुफ्तगू कर लें

हाँ उनके ख़त को लगाने से क़ब्ल हाथ अपना
लिया है पानी के पहले तो हम वुज़ू कर लें

नहीं रही है मरासिम में पहले सी शिद्दत
अगरचे रब्त हो बाक़ी तो जुस्तजू कर लें

उन्हें पसंद है बिस्मिल अगर यूँ ही “बिस्मिल”
तो नश्तरों से बदन ये लहू-लहू कर लें

अय्यूब ख़ान “बिस्मिल”

क़ब्ल=पहले , मरासिम=रिश्ते ,बिस्मिल=घायल

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