Urdu Ghazal, Latest Poetry, Samar Kabeer

समझा समझा कर हरजाई थक गया मैं – समर कबीर

समझा समझा कर हरजाई थक गया मैं समर कबीर साहिब  उस्ताद का दर्जा रखते हैं और वे ग़ज़ल की शिल्प के प्रति सजग शाइर  हैं । इस दौर के दूसरे शाइरों से भी वे उम्मीद करते हैं कि वे शिल्प और शब्दों के प्रयोग के प्रति सचेत रहें। सच ही तो है ग़ज़लगोई इतनी आसान …

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डर रहा है अब जहाँ अनुपात का दर देखकर – सोनिया वर्मा

डर रहा है अब जहाँ अनुपात का दर देखकर सोनिया वर्मा रायपुर(छत्तीसगढ़) की शायरा हैं। उनकी इस ग़ज़ल में बेटियों का दर्द, उनकी मनःस्थिति बखूबी बयाँ  हुई हैं। और यही आज की सच्चाई भी है। एक तरफ शायरा लोगों की दबी मानसिकता के प्रति आगाह करती हैं। दूसरी तरफ वही असमंजस की स्थिति मे नज़र …

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धारणाएँ हों मुखर, तो चुप रहें – गिरिराज भंडारी

धारणाएँ हों मुखर, तो चुप रहें गिरिराज भंडारी उस शख़्सियत का नाम है जिन्होंने रिटायरमेंट की उम्र में ग़ज़ल सीखना शुरू किया। उनके अंदर सीखने की तीव्र ललक थी। और शिल्प के प्रति सचेत इतने कि यदि किसी ने इस्लाह बताई तो निस्संकोच स्वीकार कर लेते हैं। लेकिन ग़ज़ल के शिल्प और शब्दों के प्रयोग …

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ख़ामख़ा हैरान होंगे इक समंदर देखकर – ‘अनुज अब्र’

क्या करेंगे आप मेरे दिल के भीतर देखकर अनुज ‘अब्र’ आज के दौर के उत्साही, मेहनती और सीखने को तत्पर शाइर हैं। जो अपनी ग़ज़ल के हर शे’र के पीछे कड़ी मेहनत करते हैं। उनकी इस गज़ल की गई उनकी मेहनत साफ दिखाई देती है। “क्या करेंगे आप मेरे दिल के भीतर देखकर ख़ामख़ा हैरान …

Barish, Shayari, Ghazal

जब भी बरसी अज़ाब की बारिश – अमित ‘अहद’

जब भी बरसी अज़ाब की बारिश बारिश रदीफ़ लेकर अमित अहद जी ने एक बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है। वैसे तो देखने में यह ज़मीन बहुत मुश्किल जान पड़ती है। लेकिन अमित अहद साहिब ने जितनी आसानी से शायरी की है वो हैरान करती है। मक्ता देखिए “प्यार से रोक दी ही है, मैंने …

वफाएँ लड़खड़ाती हैं भरोसा टूट जाता है – अशोक अंजुम

वफाएँ लड़खड़ाती हैं भरोसा टूट जाता है श्री अशोक अंजुम जी की ग़ज़लें ही उनका परिचय है। ग़ज़लों की दुनिया में वर्षों से सक्रिय श्री अशोक अंजुम साहब बिल्कुल जदीद शायरी करते हैं। चाहे वो बिम्ब और प्रतीक हों या शब्द चयन इनकी गज़लें सीधे आम आदमी से जुड़ जाती हैं। श्री अशोक अंजुम साहब …

ज़िंदगी की डोर है इक पेड़ पर अटकी हुई – सीमा शर्मा ‘मेरठी’

ज़िंदगी की डोर है इक पेड़ पर अटकी हुई सीमा शर्मा ‘मेरठी’ जी ग़ज़ल की दुनिया में पिछले कई वर्षों से सक्रिय हैं। इनकी ग़ज़लें शिल्प, कहन और प्रस्तुति के लिहाज से कसी हुई होती हैं। इसी का एक उदाहरण है यह ग़ज़ल। इस ग़ज़ल में प्रयुक्त बिम्ब व प्रतीक आश्चर्य चकित कर देते हैं, …

यूँ सब से एक रिश्ता है सभी का – रवि शुक्ल

यूँ सब से एक रिश्ता है सभी का बीकानेर, राजस्थान के श्री रवि शुक्ल जी ने कई बेहतरीन ग़ज़लें लिखी है। यह ग़ज़ल भी उन्हीं में से एक है। हाल ही में दीवान दौर ए हाज़िर प्रकाशित हुआ है। इसमें रवि शुक्ल जी की ग़ज़लें भी सम्मिलित की गई हैं। इस ग़ज़ल की बात करूँ …

बुझे चराग़ को फ़िर-फिर जला रहा हूँ मैं – अमित वागर्थ

बुझे चराग़ को फ़िर-फिर जला रहा हूँ मैं इलाहाबाद के शाइर अमित वागर्थ इलाहाबाद विश्वविद्यालय में सीनियर रिसर्च फेलो रहे हैं। अभी हाल ही में आपका चयन हरियाणा लोक सेवा आयोग से असिस्टेंट प्रोफ़ेसर (हिंदी) के पद पर हुआ है। अमित वागर्थ जी एक प्रतिभाशाली शाइर हैं। उनकी यह ग़ज़ल बहर 1212 1122 1212 22 …

हमारे दिल में रह कर थक न जाएँ – राज़िक़ अंसारी

हमारे दिल में रह कर थक न जाएँ Humare Dil, Ghazal, Razique Ansari, हमारे दिल में रहकर वरिष्ठ शाइर जनाब  राज़िक़ अंसारी साहिब की एक खूबसूरत गज़ल है। बहर 1222 1222 122 में लिखी गई है, इस ग़ज़ल का लुत्फ लें और प्रतिक्रिया भी ज़रूर दें। हमारे दिल में रह कर थक न जाएँ तुम्हारे …