OBO Live Tarahi 100/Gurpreet Singh

OBO Live Tarahi 100/Gurpreet Singh

जब से अपना बना गया है मुझे OBO Live Tarahi 100 श्रृंखला में पढ़िये गुरप्रीत सिंह जी की ग़ज़ल जो उन्होंने ओबीओ लाइव तरही मुशायरे में पेश किया था जब से अपना बना गया है मुझे खौफ़ ए फुर्कत ही खा गया है मुझे अब उमीदों का मुझ पे बोझ नहीं हारना रास आ गया …

OBO Live Tarahi-100/Er Ganesh Ji Baghi

OBO Live Tarahi-100/Er Ganesh Ji Baghi

राज़ दिल का सुना गया है मुझे पेश है OBO Live Tarahi 100 में इं. गणेश जी बागी जी की गज़ल, आप ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम के संस्थापक एवं मुख्य प्रबंधक हैं। राज़ दिल का सुना गया है मुझे प्यार अपना जता गया है मुझे कुछ तो अच्छा हुआ जो दिल टूटा अस्ल चेहरा …

Ghazal by Saurabha Pandey in Ghazal go

पगडंडियों के भाग्य में कोई नगर कहाँ – सौरभ पाण्डेय

पगडंडियों के भाग्य में कोई नगर कहाँ पेश है सौरभ पाण्डेय जी की एक ग़ज़ल। इलाहाबाद के शाइर श्री सौरभ पाण्डेय जी छंद के भी अच्छे जानकारों में से एक हैंं। छंद विधान पर उनकी एक उपयोगी किताब छंद मंजरी अंजुमन प्रकाशन से प्रकाशित हुई है। पगडंडियों के भाग्य में कोई नगर कहाँ मैदान गाँव …

OBO Live Tarahi-100/Mahendra Kumar

OBO Live Tarahi-100/Mahendra Kumar

बोलना जब से आ गया है मुझे OBO Live Tarahi-100 में पेश है महेन्द्र कुमार की ग़ज़ल जो उन्होंने ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम में आयोजित लाइव तरही मुशायरे के 100 वें अंक में प्रस्तुत की थी। बोलना जब से आ गया है मुझे चुप रहूँ ये कहा गया है मुझे मेरी सूरत बिगाड़ने वाला …

ghazal surlhab bashar

दिल से निकली ज़ुबान तक पहुँची – सुरख़ाब बशर

दिल से निकली ज़ुबान तक पहुँची पेश है सुरख़ाब बशर की एक ग़ज़ल दिल से निकली ज़ुबान तक पहुँची इक सदा आसमान तक पहुँची उस बुलंदी पे दिल को यूँ तोड़ा बात सारे जहान तक पहुँची उन के लब याद आ गए मुझको जब नज़र पान दान तक पहुँची ये मुहब्बत की कामयाबी है आशिक़ी …

ghazal Farmood Allahabadi

नहीं निगाह में मंज़िल, तो जुस्तजू ही सही – फ़रमूद इलाहाबादी

नहीं निगाह में मंज़िल, तो जुस्तजू ही सही पेश है फरमूद इलाहाबादी जी की एक मिजाहिया ग़ज़ल नहीं निगाह में मंज़िल, तो जुस्तजू ही सही किसी हसीन से “चैटिंग” पे गुफ्तगू ही सही मेरी पसंद तो दरअस्ल है तेरी आपा उसे पसंद नहीं मैं, तो यार तू ही सही अगर मिली न मुझे कोई “इंडियन” …

Pukara hai Humne Giriraj Bhandari

पुकारा है हमने उसे बार-बार – गिरिराज भंडारी

पुकारा है हमने उसे बार-बार पेश है गिरिराज भंडारी जी की एक ग़ज़ल अँधेरों के मित्रों हवा दीजिये जलाता हूँ दिया बुझा दीजिये लिये आइना सबसे मिलता रहा सभी अब मुझे बद्दुआ दीजिये हमारा यकीं चाँद से उठ गया हमें जुगनुओं का पता दीजिये पुकारा है हमने उसे बार-बार न कहना उसे फिर सदा दीजिये …

OBO Live Tarahi 100, Yograj Prabhakar

OBO Live Tarahi-100/Yograj Prabhakar

OBO Live Tarahi-100/Yograj Prabhakar OBO Live Tarahi-100 में पेश है श्री योगराज प्रभाकर जी की एक ग़ज़ल तिश्नगी से मिला गया है मुझे। पिछले आठ वर्षों से अधिक समय से ओपन बुक्स ऑनलाइन द्वारा अनवरत आयोजित किया जाना वाला ओबीओ लाइव तरही मुशायरा हाल ही में अपने आयोजन के सौ अंक पूरे कर चुका है। …

ग़ज़ल - संजू शब्दिता

मज़ा भी ज़िन्दगी का ख़ूब आया – संजू शब्दिता

मज़ा भी ज़िन्दगी का ख़ूब आया पेश है संजू शब्दिता की एक गज़ल मज़ा भी ज़िन्दगी का ख़ूब आया हमें हंसना-हंसाना ख़ूब आया हमारी दस्तरस में था कहाँ वो मगर जब हाथ आया ख़ूब आया हक़ीक़त तो मेरी सहरा है लेकिन मेरे हिस्से में दरिया ख़ूब आया बचा रक्खे थे हमने गम के आँसू हमें …

ग़ज़ल - राज़िक़ अंसारी

आतिश ए ग़म से गुज़रता रोज़ हूँ – राज़िक़ अंसारी

आतिश ए ग़म से गुज़रता रोज़ हूँ पेश है राज़िक अंसारी जी की ग़ज़ल आतिश ए ग़म से गुज़रता रोज़ हूँ रोज़ मैं जीता हूँ , मरता रोज़ हूँ जाने कब आवाज़ दे कर रोक ले उस के कूचे में ठहरता रोज़ हूँ एक दिन हो जाऊंगा मिट्टी का ढेर थोड़ा थोड़ा सा बिखरता रोज़ …