OBO Live Tarahi 100, Yograj Prabhakar

OBO Live Tarahi-100/Yograj Prabhakar

OBO Live Tarahi-100/Yograj Prabhakar OBO Live Tarahi-100 में पेश है श्री योगराज प्रभाकर जी की एक ग़ज़ल तिश्नगी से मिला गया है मुझे। पिछले आठ वर्षों से अधिक समय से ओपन बुक्स ऑनलाइन द्वारा अनवरत आयोजित किया जाना वाला ओबीओ लाइव तरही मुशायरा हाल ही में अपने आयोजन के सौ अंक पूरे कर चुका है। …

ग़ज़ल - संजू शब्दिता

मज़ा भी ज़िन्दगी का ख़ूब आया – संजू शब्दिता

मज़ा भी ज़िन्दगी का ख़ूब आया पेश है संजू शब्दिता की एक गज़ल मज़ा भी ज़िन्दगी का ख़ूब आया हमें हंसना-हंसाना ख़ूब आया हमारी दस्तरस में था कहाँ वो मगर जब हाथ आया ख़ूब आया हक़ीक़त तो मेरी सहरा है लेकिन मेरे हिस्से में दरिया ख़ूब आया बचा रक्खे थे हमने गम के आँसू हमें …

ग़ज़ल - राज़िक़ अंसारी

आतिश ए ग़म से गुज़रता रोज़ हूँ – राज़िक़ अंसारी

आतिश ए ग़म से गुज़रता रोज़ हूँ पेश है राज़िक अंसारी जी की ग़ज़ल आतिश ए ग़म से गुज़रता रोज़ हूँ रोज़ मैं जीता हूँ , मरता रोज़ हूँ जाने कब आवाज़ दे कर रोक ले उस के कूचे में ठहरता रोज़ हूँ एक दिन हो जाऊंगा मिट्टी का ढेर थोड़ा थोड़ा सा बिखरता रोज़ …

Ghazal Mirza Javed Baig

इतनी बुलंद – गज़ल, मिर्ज़ा जावेद बेग

पेश है मिर्ज़ा जावेद बेग साहिब की ग़ज़ल- “इतनी बुलंद ओ बाला तू अपनी मजाल कर” इतनी बुलंद ओ बाला तू अपनी मजाल कर मुंह ज़ोर आँधियों की ये हस्ती निढ़ाल कर ज़ुल्मत मिटा जहान से अजदाद की तरह फिर से शुजाअतों की तू क़ायम मिसाल कर ख़ुशबू से जिसकी महके वतन की गली गली …

OBO Live Tarahi-100 Santosh Khirwadkar

OBO Live Tarahi-100/Santosh Khirwadkar

गज़ल गो के OBO Live Tarahi-100 में पेश है संतोष खिरवडकर जी की ग़ज़ल- कोई आकर सिखा गया है मुझे कोई आकर सिखा गया है मुझे ज़िन्दगी जीना आ गया है मुझे मेरी क़िस्मत कि अपनी महफ़िल में ख़ुद वो आकर बुला गया है मुझे पास आकर कोई इशारों में राज़-ए-उल्फ़त बता गया है मुझे …

OBO Live Tarahi-100/Rana Pratap Singh

OBO Live Tarahi-100/Rana Pratap Singh OBO Live Tarahi-100 में पेश है ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम के प्रबंधन सदस्य श्री राणा प्रताप सिंह जी की ग़ज़ल राज़-ए-उलफ़त बता गया है मुझे। ओबीओ लाइव तरही मुशायरे को लगातार आठ वर्षों तक संचालित करने और 100 सफल अंकों तक लाने का श्रेय आयोजन के संचालक श्री राणा …

OBO Tarahi 100/Dinesh Kumar

OBO Live Tarahi-100/Dinesh Kumar

OBO Live Tarahi-100/Dinesh Kumar OBO Live Tarahi-100/Dinesh Kumar में पढ़िये कैथल, हरियाणा के शाइर दिनेश कुमार बंसल की ग़ज़ल। दिनेश कुमार बंसल प्रतिभाशाली ग़ज़लकार हैं, उनकी ग़ज़लों में शिल्प की कसावट तो है ही कहन में भी गहराई है। पेश है- आसमाँ से गिरा गया है मुझे आसमाँ से गिरा गया है मुझे मेरा अभिमान …

Saman Kabeer

OBO Live Tarahi-100/Samar Kabeer

OBO Live Tarahi-100/Samar Kabeer OBO Live Tarahi-100 शीर्षक से पोस्ट होने वाली गज़लें ओबीओ डॉट कॉम से ली गई हैं। पिछले आठ वर्षों से अधिक समय से ओपन बुक्स ऑनलाइन द्वारा अनवरत आयोजित किया जाना वाला ओबीओ लाइव तरही मुशायरा हाल ही में अपने आयोजन के सौ अंक पूरे कर चुका है। इंटरनेट पर शायद …