अय्यूब खान "बिस्मिल"

जब तअल्लुक़ आपसे बिल वास्ता हो जायेगा- अय्यूब खान “बिस्मिल”

  1. जयपुर के जनाब अय्यूब खान “बिस्मिल” न सिर्फ इंटरनेट बल्कि मंचों और अपने क्षेत्र के एक सक्रिय ग़ज़लकार हैं, जो अपनी सशक्त ग़ज़लों के ज़रिए अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते आ रहे हैं। उर्दू ग़ज़लकारों के दरमियान अय्यूब खान “बिस्मिल” साहिब अपनी एक अलग ही पहचान रखते हैं।
    शिज्जु शकूर

जब तअल्लुक़ आपसे बिल वास्ता हो जायेगा
दर्दे दिल ही बढ़ते बढ़ते ख़ुद दवा हो जायेगा

मुझको अब कुछ चाहियेँ बे-मेहरियाँ भी आपकी
लुत्फ़ अगर हद से बढ़ा तो बद-मज़ा हो जायेगा

ज़ख़्म दुनिया को न अपना यूँ दिखाया कीजिये
गर नमक छिड़का किसी ने फिर हरा हो जायेगा

आज़माते है चलो हम अपने अपने ज़र्फ़ को
किसको कितनी है मुहब्बत फैसला हो जायेगा

दाग़ सा इक बन गया दिल पे तुम्हारे ज़ुल्म से
अश्क़ से सींचा इसे तो गुलनुमा हो जायेगा

क्यों संवर कर आईने के सामने आते हो तुम
देखना उसको कभी तुमसे गिला हो जायेगा

आके देखो अपने बिस्मिल की कभी हालत जो तुम
हिज्र में गुज़रे है क्या तुम को पता हो जायेगा
बिल वास्ता=बेशक, बे-मेहरियाँँ=अनदेखी, हिज्र=जुदाई

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1 Comment

  1. Ayub Khan says:

    आपकी मुहब्बतों और ज़र्रा नवाज़ी के लिए आपका शुक्र गुज़ार हूँ शिज्जु शकूर साहब

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