संजू शब्दिता

अब्र ने चाँद की हिफ़ाजत की – संजू शब्दिता

अब्र ने चाँद की हिफ़ाजत की

संजू शब्दिता इलाहाबाद की एक प्रतिभाशाली शायरा हैं। उनकी प्रतिभा की झलक इस ग़ज़ल में नज़र आ जाती है। खूबसूरत मतले से शुरूअ होकर आखिरी शे’र तक संजू शब्दिता ने अपनी छाप छोड़ी है। यह ग़ज़ल उन्होंने बहर 2122 1212 22 पर कही है।

अब्र ने चाँद की हिफ़ाजत की
चाँद ने खुद भी खूब हिम्मत की

आज दरिया बहुत उदास लगा
एक कतरे ने फिर बग़ावत की

वो परिंदा हवा को छेड़ गया
उसने क्या खूब ये हिमाक़त की

वक़्त मुंसिफ़ है फ़ैसला देगा
क्या जरूरत किसी अदालत की

धूप का दम निकल गया आख़िर
छांव होने लगी है शिद्दत की

अब्र –  बादल, मुंसिफ – जज,

 

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