Ghazal, Rajesh Kumari Raj, Ghazalgo
- राजेश कुमारी 'राज'

मौला की रहमतों का है अंजाम आदमी – राजेश कुमारी ‘राज’

मौला की रहमतों का है अंजाम आदमी

हाज़िर है देहरादून की शायरा राजेश कुमारी जी की एक ग़ज़ल। अपनी बात कहने के लिए बड़ी आहंग खेज बह्र का सहारा लिया है। मतले से ही एक मेयारी कलाम का अहसास हो जाता है जो शेर दर शेर आगे चलता है। ग़ज़ल शायरा के फ़लसफ़े को बख़ूबी बयान करती हुई आदमी की पहचान कराने में कामयाब है। नज़ीर अकबराबादी बरबस ही इस ग़ज़ल के साथ याद आ जाते हैं।
-रवि शुक्ल

मौला की रहमतों का है अंजाम आदमी
माटी को जिस्म देके दिया नाम आदमी

अच्छा बुरा नसीब  लिखे जाँचकर खुदा
रखता हिसाब जैसा करे काम आदमी

आबाद इक हुनर से यहाँ इक फ़रेब से
कोई यहाँ पे ख़ास कोई आम आदमी

नापाक साजिशों ने किये बंद रास्ते
अपने ज़मीर में हुआ गुमनाम आदमी

इक नामचीं जमीन पे बैठा ही रह गया
पर ताज-ओ-तख्त पा गया बदनाम आदमी

व्यापार झूठ के तो यहाँ  मुफ्त चल रहे
सच्चाई का चुकाता रहा दाम आदमी

इक इक कदम कदम पे है अल्लाह की नज़र
पाता है वक़्त वक़्त पे पैग़ाम आदमी

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