Ghazal Go

आज के ग़ज़ल गो

आसमाँ में दिये उछाल दूँ क्या – अर्पित शर्मा

आसमाँ में दिये उछाल दूँ क्या

पेश है ग़ज़ल गो अर्पित शर्मा की एक ग़ज़ल

आसमाँ में दिये उछाल दूँ क्या
चाँद में और नूर डाल दूँ क्या

आँख लगते ही आसमान में था
रूह को जिस्म से निकाल दूँ क्या

खुद को आसान वो समझता है
मैं उसे मुश्किलो में डाल दूँ क्या

सब के सब लग रहे है पागल से
अब नये इनको खद-ओ- खाल दूँ क्या

शोर सड़कों पे है बहुत ज़्यादा
खुद को सूने मकाँ में डाल दूँ क्या

देखा मुझको तो वो भी शरमा गये
एक इशारा करूँ सवाल दूँ क्या

अपनी मुठ्ठी से छोड़ कर जुगनू
इन सितारों को एक मिसाल दूँ क्या

अर्पित शर्मा ‘अर्पित’

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