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ओबीओ लाइव तरही-100/मुनव्वर अली ताज

पेश है ओबीओ लाइव तरही-100 में मोहतरम मुनव्वर अली ताज की ग़ज़ल यार करके जुदा गया है मुझे यार करके जुदा गया है मुझे याद का घुन लगा गया है मुझे वो सलीक़ा सिखा गया है मुझे घोलकर ग़म पिला गया है मुझे ज़ख़्म ऐसा दिया गया है मुझे दर्द कच्चा चबा गया है मुझे …

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ओबीओ लाइव तरही-100/मो. आरिफ़

पेश है ओबीओ लाइव तरही-100 में उज्जैन के शाइर मो. आरिफ़ साहिब की गज़ल मेरी क़ीमत बता गया है मुझे मेरी क़ीमत बता गया है मुझे राह से वो हटा गया है मुझे क़ब्ल मरने के वो ये कहने लगा ये तकब्बुर मिटा गया है मुझे जिसकी रग-रग में झूठ पिन्हाँ है आइना वो दिखा …

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राह में एक राहबर के सिवा – सुनीता पाण्डेय ‘सुरभि’

राह में एक राहबर के सिवा सुनीता पाण्डेय ‘सुरभि’ इलाहाबाद की शायरा हैं। जो अपने लेखनी से अक्सर प्रभावित करती हैं। उनकी यह ग़ज़ल आपको ज़रूर पसंद आएगी। राह में एक राहबर के सिवा कुछ नहीं चाहा हमसफ़र के सिवा एक मरकज़ पे ये नहीं रुकती ज़िन्दगी क्या है इक सफ़र के सिवा ऐसे किरदार …

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आँखो में खून देखें तो क़दमों पे सर झुकाएँ – एहतराम इस्लाम

आँखो में खून देखें पेश है एहतराम इस्लाम साहिब की एक ग़ज़ल- आँखो में खून देखें तो क़दमों पे सर झुकाएँ आँसू मिलें तो लोग मुझे ठोकर लगाएँ ला-हासिली ही ठहरी जो हर बह्स का नसीब क्या सोचकर किसी से कोई गुफ़्तगू चलाएँ जाता है सीधा दोस्तो शमशान की तरफ़ इस रास्ते पे आप अगर …

ओबीओ लाइव तरही ग़ज़ल 100 नादिर खान

ओबीओ लाइव तरही-100/ नादिर खान

ज़हर अपना पिला गया है मुझे ओबीओ लाइव तरही-100 में पेश है नादिर खान साहिब की ग़ज़ल ज़हर अपना पिला गया है मुझे चापलूसी सिखा गया है मुझे कत्ल करना तो शौक है उसका और कातिल बता गया है मुझे . मै जिसे नासमझ, समझ बैठा आईना वो दिखा गया है मुझे फिर मैं कैसे …

Ghazal go, Ehtaram Islam

लम्हा जो दिल में तेरी याद जगा देता है – एहतराम इस्लाम

पेश है एहतराम इस्लाम साहिब की किताब ‘हाज़िर है एह्तराम’ से एक ग़ज़ल लम्हा जो दिल में तेरी याद जगा देता है लम्हा जो दिल में तेरी याद जगा देता है दश्त ए वीराँ को भी गुलज़ार बना देता है सफ़्ह’-ए-ज़ेह्न पे यादों के क़लम से कोई नाम लिखता है कोई और मिटा देता है तश्न’-लब …

obo live tarhi 100 ghazal saurabh pandey

ओबीओ लाइव तरही – 100/ सौरभ पाण्डेय

छोड़ कर तू चला गया है मुझे ओबीओ लाइव तरही – 100 में पेश है श्री सौरभ पाण्डेय जी की ग़ज़ल छोड़ कर तू चला गया है मुझे सबसे कहना ये भा गया है मुझे दोस्ती में परत जो होती है यार मेरा दिखा गया है मुझे तुम सियासत के चोंचले रक्खो खेल का ढंग …

ghazal ehtaram islam

आँखो में भड़कती हैं आक्रोश की ज्वालाएँ – एहतराम इस्लाम

आँखो में भड़कती हैं मोहतरम एहतराम इस्लाम साहिब की किताब ‘है तो है’ से एक ग़ज़ल आँखो में भड़कती हैं आक्रोश की ज्वालाएँ हम लांघ गये हैं शायद संतोष की सीमाएँ पग-पग पे प्रतिष्ठित हैं पथ-भ्रष्ट दुराचारी इस नक्शे पे हम खुद को किस बिन्दु पे दर्शाएँ अनुभूति की दुनिया में भूकम्प-सा आया है आधार …

Mukaddar, Giriraj

जो हिकमतों से मुक़द्दर तराश लेते हैं – गिरिराज भंडारी

जो हिकमतों से मुक़द्दर तराश लेते हैं पेश है गिरिराज भंडारी जी की एक गज़ल – जो हिकमतों से मुक़द्दर तराश लेते हैं पड़े जो वक़्त वो मंज़र तराश लेते हैं वो मुझसे पूछने आये हैं मा’ना हँसने का सुकूँ के पल से जो महशर तराश लेते हैं उन्हें यक़ीन है वो आँधियाँ बना लेंगे …

सुरखाब बशर, ओबीओ लाइव तरही

OBO Live Tarahi-100/Surkhab Bashar

OBO Live Tarahi-100/Surkhab Bashar OBO Live Tarahi-100 में पेश है उज्जैन के शाइर सुरख़ाब बशर जी की एक गज़ल जाम ऐसा पिला गया है मुझे जाम ऐसा पिला गया है मुझे चाँद सा जगमगा गया है मुझे इश्क़ में ऐसे टूटता है दिल गिर के शीशा बता गया है मुझे हिज्र के ग़म का काफ़िला …