अशोक अंजुम

वफाएँ लड़खड़ाती हैं भरोसा टूट जाता है – अशोक अंजुम

वफाएँ लड़खड़ाती हैं भरोसा टूट जाता है

श्री अशोक अंजुम जी की ग़ज़लें ही उनका परिचय है। ग़ज़लों की दुनिया में वर्षों से सक्रिय श्री अशोक अंजुम साहब बिल्कुल जदीद शायरी करते हैं। चाहे वो बिम्ब और प्रतीक हों या शब्द चयन इनकी गज़लें सीधे आम आदमी से जुड़ जाती हैं। श्री अशोक अंजुम साहब सब टीवी के कार्यक्रम ‘वाह वाह क्या बात है’ में भी शिरकत फरमा चुके हैं। हाल ही में अंजुमन प्रकाशन द्वारा प्रकाशित होने वाले साझा संकलन ‘ग़ज़ल प्रसंग’ में भी आप इनकी ग़ज़लों के लुत्फ़ ले सकते हैं। यहाँ प्रस्तुत ग़ज़ल श्री अशोक अंजुम साहिब ने बहर 1222 1222 1222 1222 पर कही है।

 

Ghazal, Ashok Anjum, Bharosa, Shayari

वफाएँ लड़खड़ाती हैं भरोसा टूट जाता है
जरा-सी भूल से रिश्तों का धागा टूट जाता है

सलाखें देखकर घबरा रहा है तू परिन्दे क्यों
अगर शिद्दत से हो कोशिश तो पिंजरा टूट जाता है

परिन्दे वे कभी ऊँची उड़ानें भर नहीं सकते
जरा-सी धूप से जिनका इरादा टूट जाता है

हया आँखों की मर जाए तो घूँघट की जरूरत क्या
हया मर जाए तो हर एक परदा टूट जाता है

यकीं रखना तुम्हारी कोशिशें ही काम आएँगी
कि कोशिश रंग लाती हैं कि वादा टूट जाता है

लचक रहती है जिन पेड़ों में लम्बी उम्र जीते हैं
अड़ा रहने पे तूफानों में क्या-क्या टूट जाता है

-अशोक अंजुम

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4 Comments

  1. DINESH BANSAL says:

    Bahut umda ghazal.. waah waah

  2. राज़िक़ अंसारी says:

    Lajawaaaaaaaaaaaab ghazal hai mohtram bahut khoooooooob

  3. हरिवल्लभ says:

    बहुत सुन्दर ग़ज़ल , बधाईं

  4. राजेश कुमारी ' राज ' says:

    बहुत उम्दा ग़ज़ल

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