- दरवेश भारती

बुलंदी हो बुलंदी-सी तो ये मशहूर करती है- दरवेश भारती

बुलंदी हो बुलंदी-सी तो ये मशहूर करती है- दरवेश भारती

Darvesh Bharti | Ghazal-go.com |

श्री दरवेश भारती जी सिर्फ एक नाम नहीं बल्कि अपने आप में पूरा युग हैं, वे विगत कई दशकों से ग़ज़ल की दुनिया में सक्रिय हैं। उर्दू शब्दों के साथ आम बोलचाल के शब्दों को खूबसूरती से अपनी ग़ज़लों में समाहित कर आज के परिवेश को श्री दरवेश भारती जी ने बेहतरीन तरीके से प्रस्तुत किया है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होने के अलावा आपका कई ग़जल संग्रह भी प्रकाशित हो चुका है। दिल्ली के रहने वाले श्री दरवेश भारती जी की ग़ज़लों ने अलग-अलग कालखंडों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

बुलंदी हो बुलंदी-सी तो ये मशहूर करती है
अगर हद से ज़ियादा हो तो ये मग़रूर करती है

सुहाने ख़्वाब हो और वो भी हों ता’बीर से भरपूर
यही दौलत है वो जो नींद तक काफूर करती है

नहीं है होश में फिर भी वो उठ-उठकर है चिल्लाता
है कुछ तो बात जो इसपर उसे मजबूर करती है

मेरी औक़ात से बढ़कर मुझे देना न कुछ मालिक
ज़रूरत से ज़ियादा रौशनी बेनूर करती है

इसे लेने में कोताही न हरगिज़ कीजिये साहिब
बुज़ुर्गों की दुआ ही हर बला को दूर करती है

जहाँ तक हो सके इससे बनाकर फ़ासिला रखिये
अना ही हर बशर के ख़्वाब चकनाचूर करती है

झुकी रहती हैं नज़रें उम्र-भर के वास्ते ‘दरवेश’
कि ये एहसानमंदी इसक़दर मशकूर करती है

‘दरवेश’ भारती

डी-38, निहाल विहार, नांगलोई, नयी दिल्ली-110041
मो. 09268798930

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