दिखाने को अक्सर वो हँसता बहुत है – अय्यूब ख़ान “बिस्मिल”

दिखाने को अक्सर वो हँसता बहुत है ग़मे ज़ीस्त से जो शनासा बहुत है यूँ ज़ख़्मों से अपना भी नाता बहुत है मगर दर्द दिल में छुपाया बहुत है मुहब्बत तो कर ली खुले आम लेकिन ज़माने की रस्मों से सहमा बहुत है करेगा भला कैसे सैराब हमको समंदर है लेकिन वो खारा बहुत है …

वफ़ा की उनसे चलो फिर से आरज़ू कर लें – अय्यूब खान “बिस्मिल”

वफ़ा की उनसे चलो फिर से आरज़ू कर लें यूँ तार तार मुहब्बत की आबरू कर लें हुआ जो चाक ये दिल क्यूँ न हम रफू कर लें बुलाओ उनको के फिर उनसे गुफ्तगू कर लें हाँ उनके ख़त को लगाने से क़ब्ल हाथ अपना लिया है पानी के पहले तो हम वुज़ू कर लें …

जब तअल्लुक़ आपसे बिल वास्ता हो जायेगा- अय्यूब खान “बिस्मिल”

जयपुर के जनाब अय्यूब खान “बिस्मिल” न सिर्फ इंटरनेट बल्कि मंचों और अपने क्षेत्र के एक सक्रिय ग़ज़लकार हैं, जो अपनी सशक्त ग़ज़लों के ज़रिए अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते आ रहे हैं। उर्दू ग़ज़लकारों के दरमियान अय्यूब खान “बिस्मिल” साहिब अपनी एक अलग ही पहचान रखते हैं। –शिज्जु शकूर जब तअल्लुक़ आपसे बिल वास्ता …