Giriraj Bhandari, Ghazal, Zindagi

है तर्कों की कहाँ हद जानता हूँ – गिरिराज भंडारी

है तर्कों की कहाँ हद जानता हूँ गिरिराज भंडारी जी की ग़ज़ल हमेशा सच्चाई के करीब होती है। तर्कों कहाँ हद जानता हूँ में उनका अनुभव और लोगों को देखने का नज़रिया दिखाई देता है। करें आकाश को छूने के जो दावे, मैं उनका मक़सद जानता हूँ इस शेर में उनके अनुभव की झलक दिखाई …

Hindi Ghazal, Latest Poetry

धारणाएँ हों मुखर, तो चुप रहें – गिरिराज भंडारी

धारणाएँ हों मुखर, तो चुप रहें गिरिराज भंडारी उस शख़्सियत का नाम है जिन्होंने रिटायरमेंट की उम्र में ग़ज़ल सीखना शुरू किया। उनके अंदर सीखने की तीव्र ललक थी। और शिल्प के प्रति सचेत इतने कि यदि किसी ने इस्लाह बताई तो निस्संकोच स्वीकार कर लेते हैं। लेकिन ग़ज़ल के शिल्प और शब्दों के प्रयोग …