रेत पर फूल खिलाने आए – जयनित मेहता

रेत पर फूल खिलाने आए दश्त में कितने दीवाने आए मिल गया राह में बचपन का यार याद फिर गुज़रे ज़माने आए धूप के पंख निकल आए जब कुछ शजर जाल बिछाने आए एक दिन बेखुदी जो ले डूबी तब मेरे होश ठिकाने आए वक़्त बेवक्त भड़ककर, आँसू ग़म की सरकार गिराने आए नाम लिक्खा …