तेरी ज़िद दुरुस्त भी है मगर – डॉ. मंजु कछावा ‘अना’

तेरी ज़िद दुरुस्त भी है मगर मेरा अपना भी तो उसूल है जो तेरी निगाह में अहम है वो मेरी नज़र में फ़ुज़ूल है कोई वाक़या किसी फूल का न सुनाओ अहले चमन मुझे मेरी आँख आज है शबनमी मेरा दिल भी आज मलूल है तू दयार ए ग़म में धकेल दे,या मसर्रतों का जहान …

Urdu Ghazal, Manju Kachhawa, Ghazalgo, Bikaner

जो दश्ते-ज़ीस्त से हँस कर गुज़र नहीं सकता – डॉ. मंजु कछावा ‘अना’

जो दश्ते-ज़ीस्त से हँस कर गुज़र नहीं सकता आज हम आपको रू-ब-रू करवाते हैं मरू नगरी बीकानेर की तेजी से लोकप्रिय होती हुई शायरा मोहतरमा डॉ मंजू कच्छावा ‘अना’ साहिबा की ग़ज़ल से। डॉ. मंजू कच्छावा बीकानेर के साहित्यकाश में एक उभरता हुआ नाम है जिन्होंने थोड़े समय में ही अपनी उम्दा लेखनी से एक …