OBO Tarahi 100/Dinesh Kumar

OBO Live Tarahi-100/Dinesh Kumar

OBO Live Tarahi-100/Dinesh Kumar OBO Live Tarahi-100/Dinesh Kumar में पढ़िये कैथल, हरियाणा के शाइर दिनेश कुमार बंसल की ग़ज़ल। दिनेश कुमार बंसल प्रतिभाशाली ग़ज़लकार हैं, उनकी ग़ज़लों में शिल्प की कसावट तो है ही कहन में भी गहराई है। पेश है- आसमाँ से गिरा गया है मुझे आसमाँ से गिरा गया है मुझे मेरा अभिमान …

तरतीब से सजे दर-ओ-दीवार घर नहीं – दिनेश कुमार

तरतीब से सजे दर-ओ-दीवार घर नहीं सुख-दुख में तेरे साथ अगर हमसफ़र नहीं ऐसा नहीं कि राहे-सफ़र में शजर नहीं आसाँ ये ज़िन्दगी की मगर रहगुज़र नहीं उपदेश दूसरों को सभी लोग दे रहे ख़ुद उन पे जो अमल करे ऐसा बशर नहीं औरों के रंजो-ग़म से है अब किसको वास्ता पहले सी रौनकें किसी …

ख़तरे में जब वज़ीर था प्यादे बदल गए – दिनेश कुमार

ख़तरे में जब वज़ीर था प्यादे बदल गए मौक़ा परस्त दोस्त थे पाले बदल गए आये न लौट कर वे नशेमन में फिर कभी उड़ने को पर हुए तो परिन्दे बदल गए होंठों पे इनके आज खिलौनों की ज़िद नहीं ग़ुरबत का अर्थ जान के बच्चे बदल गए हालाँकि मैं वही हूँ मेरे भाई भी …

मिसाल ए ख़ाक सभी वक़्त के ग़ुबार में थे – दिनेश कुमार

कैथल, हरियाणा के शायर दिनेश बंसल जी से मेरी रूबरू मुलाकात कभी नहीं हुई है। मैंने उनको जितना भी जाना है उनकी ग़ज़लों से जाना है; उनकी ग़ज़लें उनके व्यक्तित्व का परिचायक हैं। स्वभाव से मितभाषी दिनेश बंसल जी की ग़ज़लें खूब बोलती हैं। श्री दिनेश जी ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम पर भी सक्रिय …