ग़ज़ल - राज़िक़ अंसारी

आतिश ए ग़म से गुज़रता रोज़ हूँ – राज़िक़ अंसारी

आतिश ए ग़म से गुज़रता रोज़ हूँ पेश है राज़िक अंसारी जी की ग़ज़ल आतिश ए ग़म से गुज़रता रोज़ हूँ रोज़ मैं जीता हूँ , मरता रोज़ हूँ जाने कब आवाज़ दे कर रोक ले उस के कूचे में ठहरता रोज़ हूँ एक दिन हो जाऊंगा मिट्टी का ढेर थोड़ा थोड़ा सा बिखरता रोज़ …

हमारे दिल में रह कर थक न जाएँ – राज़िक़ अंसारी

हमारे दिल में रह कर थक न जाएँ Humare Dil, Ghazal, Razique Ansari, हमारे दिल में रहकर वरिष्ठ शाइर जनाब  राज़िक़ अंसारी साहिब की एक खूबसूरत गज़ल है। बहर 1222 1222 122 में लिखी गई है, इस ग़ज़ल का लुत्फ लें और प्रतिक्रिया भी ज़रूर दें। हमारे दिल में रह कर थक न जाएँ तुम्हारे …

आंखों की वीरानी पढ़ कर देखो ना- राज़िक अंसारी

इंदौर के रहने वाले वरिष्ठ शायर मोहतरम राज़िक अंसारी जी उर्दू गज़लों में अच्छा खासा दख्ल रखते हैं, वे वर्षों से विभिन्न मंचों पर सक्रिय हैं। उनकी गज़लों को रेख्ता डॉट ओआरजी जैसे प्रतिष्ठित साइट में जगह मिली है। वे बदलते दौर के साथ अपनी ग़ज़लों को लेकर चले हैं, जो यह साबित करने के …