- शिज्जु शकूर

जो तिरंगे में लिपटकर अपने घर लौट आए हैं उन सभी वीरों की रूहें जाविदानी हो गईं

निस्बतें इस दौर में यारो कहानी हो गईं और बातें भी उसूलों की पुरानी हो गईं मुफ़लिसी, बदकारियाँ, महँगाई, हिंसा,…

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