ग़ज़ल - संजू शब्दिता

मज़ा भी ज़िन्दगी का ख़ूब आया – संजू शब्दिता

मज़ा भी ज़िन्दगी का ख़ूब आया पेश है संजू शब्दिता की एक गज़ल मज़ा भी ज़िन्दगी का ख़ूब आया हमें हंसना-हंसाना ख़ूब आया हमारी दस्तरस में था कहाँ वो मगर जब हाथ आया ख़ूब आया हक़ीक़त तो मेरी सहरा है लेकिन मेरे हिस्से में दरिया ख़ूब आया बचा रक्खे थे हमने गम के आँसू हमें …

अब्र ने चाँद की हिफ़ाजत की – संजू शब्दिता

अब्र ने चाँद की हिफ़ाजत की संजू शब्दिता इलाहाबाद की एक प्रतिभाशाली शायरा हैं। उनकी प्रतिभा की झलक इस ग़ज़ल में नज़र आ जाती है। खूबसूरत मतले से शुरूअ होकर आखिरी शे’र तक संजू शब्दिता ने अपनी छाप छोड़ी है। यह ग़ज़ल उन्होंने बहर 2122 1212 22 पर कही है। अब्र ने चाँद की हिफ़ाजत …