ghazal surlhab bashar

दिल से निकली ज़ुबान तक पहुँची – सुरख़ाब बशर

दिल से निकली ज़ुबान तक पहुँची पेश है सुरख़ाब बशर की एक ग़ज़ल दिल से निकली ज़ुबान तक पहुँची इक सदा आसमान तक पहुँची उस बुलंदी पे दिल को यूँ तोड़ा बात सारे जहान तक पहुँची उन के लब याद आ गए मुझको जब नज़र पान दान तक पहुँची ये मुहब्बत की कामयाबी है आशिक़ी …