Ghazal, Aarti Kumari, Love Poetry
- डॉ आरती कुमारी

आप तो रिश्तों में भी चालाकियाँ करते रहे – डॉ. आरती

आप तो रिश्तों में भी चालाकियाँ करते रहे

मुज़फ़्फ़पुर(बिहार) निवासी डॉ. श्रीमती आरती कुमारी एक आला दर्ज़े की शायरा हैं। उनकी ग़ज़लों में शिल्प की कसावट तो है ही कहन भी सार्थक है। ग़ज़ल सिर्फ शब्दों को बहर में सजाने का नाम नहीं है। ग़ज़ल तब मुकम्मल(पूर्ण) होती है जब दो मिसरों के बीच जो बात न कही गई हो वह भी नुमायाँ(प्रकट) हो जाए। मसलन यह शे’र देखिए,

“अब ये जाना झूठ का चेहरा चमकता है यहाँ
हम हैं कि सच कहने की गुस्ताखियाँ करते रहे”

Ghazal, Aarti Kumari, Love Poetry

जो आदमी चेहरे पर झूठ की परत चढ़ाकर रखता है हमें अक्सर वही कामयाब नज़र आता है। पता नहीं इन्हें इतनी हिम्मत कहाँ मिलती हैं। सच कहना कठिन काम है। आज की तारीख में झूठे लोगों के बीच सच कहना तो वाकई गुस्ताखी है।

आप तो रिश्तों में भी चालाकियाँ करते रहे
हम ज़माने के लिए नादानियाँ करते रहे

हम बदल जाते बदल जाती फिज़ा इस दौर की
सब बदल जाए यही गुस्ताखियाँ करते रहे

जिन जवानों के भरोसे देश की तक़दीर है
वो नशे में चूर हों शैतानियाँ करते रहे

राहे उल्फत थी कठिन दुश्मन ज़माना था मगर
उम्र भर दिल की सुनी मनमानियाँ करते रहे

अब ये जाना झूठ का चेहरा चमकता है यहाँ
हम हैं कि सच कहने की गुस्ताखियाँ करते रहे

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