Hindi Ghazal, Latest Poetry, 4 Women
- सोनिया वर्मा

डर रहा है अब जहाँ अनुपात का दर देखकर – सोनिया वर्मा

डर रहा है अब जहाँ अनुपात का दर देखकर

सोनिया वर्मा रायपुर(छत्तीसगढ़) की शायरा हैं। उनकी इस ग़ज़ल में बेटियों का दर्द, उनकी मनःस्थिति बखूबी बयाँ  हुई हैं। और यही आज की सच्चाई भी है। एक तरफ शायरा लोगों की दबी मानसिकता के प्रति आगाह करती हैं। दूसरी तरफ वही असमंजस की स्थिति मे नज़र आती हैं कि आदमी पर भरोसा करें कि नहीं करें। कुल मिलाकर यह एक बेहतरीन ग़ज़ल हुई है। सोनिया वर्मा की यह ग़ज़ल 2122 2122 2122 212 बहर पर आधारित है।

Hindi Ghazal, Latest Poetry, 4 Women

डर रहा है अब जहाँ अनुपात की दर देखकर
बेटियाँ मारी गयी इच्छाओं के सर देखकर

क्यों हो हैराँ हाथ में अपनों के पत्थर देखकर
आदमी की ज़ात समझा कौन पैकर देखकर

हक की बातें करने वाले लोग ही देंगें द़गा
जाँच लो हर आदमी को तुम सँभल कर देखकर

रो रहा था एक बच्चा जो गुबारे के लिए
हँस पड़ा है पेड़ पर नटखट-सा बंदर देखकर

सादगी को जो कभी ज़ेवर समझता था वही
आज कैसे मर मिटा है रूप सुन्दर देखकर

क्या छुपा है किसके मन में, अब नहीं है पूछना
और भी उलझा करेंगे उनके उत्तर देखकर

9 thoughts on “डर रहा है अब जहाँ अनुपात का दर देखकर – सोनिया वर्मा

  1. बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है। आपकी टिप्पणी ने और सुंदर बना दिया। सोनिया जी को बधाई।

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