ghazal surlhab bashar
सुरख़ाब बशर

दिल से निकली ज़ुबान तक पहुँची – सुरख़ाब बशर

दिल से निकली ज़ुबान तक पहुँची

पेश है सुरख़ाब बशर की एक ग़ज़ल

Ghazal, Surkhab Bashar

दिल से निकली ज़ुबान तक पहुँची
इक सदा आसमान तक पहुँची

उस बुलंदी पे दिल को यूँ तोड़ा
बात सारे जहान तक पहुँची

उन के लब याद आ गए मुझको
जब नज़र पान दान तक पहुँची

ये मुहब्बत की कामयाबी है
आशिक़ी इम्तिहान तक पहुँची

पाँव फैलाई ऐसी ग़ुरबत ने
घर की हर शय दुकान तक पहुँची

अब तो “सुरख़ाब” नींद से जागो
धूप अपने मकान तक पहुँची

पाँव फैलाई ऐसी ग़ुरबत ने
घर की हर शय दुकान तक पहुँची

सुरख़ाब बशर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *