Ghazal by Saurabha Pandey in Ghazal go
सौरभ पाण्डेय

पगडंडियों के भाग्य में कोई नगर कहाँ – सौरभ पाण्डेय

पगडंडियों के भाग्य में कोई नगर कहाँ

पेश है सौरभ पाण्डेय जी की एक ग़ज़ल। इलाहाबाद के शाइर श्री सौरभ पाण्डेय जी छंद के भी अच्छे जानकारों में से एक हैंं। छंद विधान पर उनकी एक उपयोगी किताब छंद मंजरी अंजुमन प्रकाशन से प्रकाशित हुई है।

Ghazal by Saurabha Pandey in Ghazal go

पगडंडियों के भाग्य में कोई नगर कहाँ
मैदान गाँव खेत सफ़र किन्तु घर कहाँ

होठों पे राह और सदा मंज़िलों की बात
पर इन लरजते पाँव से होगा सफ़र कहाँ

हम रोज़ मर रहे हैं यहाँ, आ कभी तो देख
किस कोठरी में दफ़्न हैं शम्सो-क़मर कहाँ

सबके लिए दरख़्त ये साया लिये खड़ा
कब सोचता है धूप से मुहलत मगर कहाँ

जो कृष्ण अब नही तो कहाँ द्रौपदी कहीं
सो, मित्रता की ताब में कोई असर कहाँ

क़ातिल तरेर आँख जताता है दोस्ती
ऐसे में कौन कण्ठ ही होगा मुखर कहाँ

2 Comments

  1. alok mittal says:

    Wahh shandaar gazal ..

  2. सौरभ पाण्डेय says:

    शिज्जू भाई, आपने ख़ाकसार की इस कोशिश को जो इज़्ज़त बख़्शी उसके लिए तहे-दिल से शुक़्रग़ुज़ार हूँ..
    शुभातिशुभ
    सौरभ

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