राज़िक अंसारी

हमारे दिल में रह कर थक न जाएँ – राज़िक़ अंसारी

हमारे दिल में रह कर थक न जाएँ

Humare Dil, Ghazal, Razique Ansari,

हमारे दिल में रहकर वरिष्ठ शाइर जनाब  राज़िक़ अंसारी साहिब की एक खूबसूरत गज़ल है। बहर 1222 1222 122 में लिखी गई है, इस ग़ज़ल का लुत्फ लें और प्रतिक्रिया भी ज़रूर दें।

Humare Dil, Ghazal, Razique Ansari,
हमारे दिल में रह कर थक न जाएँ
तुम्हारे ग़म यहाँ पर थक न जाएँ

हमें तो ख़ैर आदत हो चुकी है
चला के लोग पत्थर थक न जाएँ

हमारी दास्ताँ पर रोते रोते
तुम्हारे दीदा ए तर थक न जाएँ

निकाला है दिलों ने काम इतना
कहीं दस्ते रफ़ूगर थक न जाएँ

चरागों में ग़ज़ब का हौसला है
हवा ! तेरे ये लश्कर थक न जाएँ

राज़िक़ अंसारी
09827616484

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