Ghazal Mirza Javed Baig
मिर्ज़ा जावेद बेग

इतनी बुलंद – गज़ल, मिर्ज़ा जावेद बेग

पेश है मिर्ज़ा जावेद बेग साहिब की ग़ज़ल- “इतनी बुलंद ओ बाला तू अपनी मजाल कर”

Ghazal Mirza Javed Baig

इतनी बुलंद ओ बाला तू अपनी मजाल कर
मुंह ज़ोर आँधियों की ये हस्ती निढ़ाल कर

ज़ुल्मत मिटा जहान से अजदाद की तरह
फिर से शुजाअतों की तू क़ायम मिसाल कर

ख़ुशबू से जिसकी महके वतन की गली गली
तहज़ीब ए हिन्द के वही रिश्ते बहाल कर

ए हुक्मरान ए वक़्त बहुत सह चुके सितम
अब शर-पसंद लोगों का जीना मुहाल कर

वो दिन भी क्या थे टूट के मिलते थे आप भी
रखते थे हम भी अपना कलेजा निकाल कर

मिर्ज़ा जावेद बैग

बुलन्द ओ बाला – ऊँचा और श्रेष्ठ, मजाल – शक्ति, सामर्थ्य
जुल्मत – अँधेरा, अजदाद – पूर्वज, शुजाअत – बहादुरों(शुजाअ – बहादुर)
शर-पसंद – झगड़ालू,

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