Barish, Shayari, Ghazal
- अमित 'अहद'

जब भी बरसी अज़ाब की बारिश – अमित ‘अहद’

जब भी बरसी अज़ाब की बारिश

बारिश रदीफ़ लेकर अमित अहद जी ने एक बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है। वैसे तो देखने में यह ज़मीन बहुत मुश्किल जान पड़ती है। लेकिन अमित अहद साहिब ने जितनी आसानी से शायरी की है वो हैरान करती है। मक्ता देखिए “प्यार से रोक दी ही है, मैंने उनकी इताब की बारिश”। कितनी नज़ाकत से उन्होंने अपनी बात कही है। उनकी यह गज़ल 2122 1212 22 बहर पर है। इस बहर के आखिरी रुक्न को 112 करने की छूट है।

 Barish, Shayari, Ghazal

जब भी बरसी अज़ाब की बारिश
रास आयी शराब की बारिश

मैंने पूछा कि प्यार है मुझसे?
उसने कर दी गुलाब की बारिश

मैंने तो इक सवाल पूछा था!
उसने कर दी जवाब की बारिश

हुस्न वालों के वास्ते कर दे
ऐ ख़ुदा तू हिजाब की बारिश

शायरी पर यक़ीं है बरसेगी
एक दिन तो ख़िताब की बारिश

मैंने इक जाम और माँगा था
उसने कर दी हिसाब की बारिश

देर तक साथ भीगे हम उसके
हमने यूँ कामयाब की बारिश

प्यार से रोक दी ‘अहद’ मैंने
आज उसके इताब की बारिश

अज़ाब – मुसीबत, इताब – गुस्सा

अमित “अहद “
सहारनपुर
09675150538

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