jheel aankhon aaina roshan ravi shukla
रवि शुक्ल

झील सी आँखों में कोई आइना रोशन करें – रवि शुक्ल

Ghazal – Jheel si Aankho’n mei’n

झील सी आँखों में कोई आइना रोशन करें
यानी इक हैरानियों का सिलसिला रोशन करें

दश्त की तन्हाइयों में हैं अगर तारीक़ियाँ
बात करने के लिए इक तज़किरा रोशन करें

पत्थरों ने कब किये हैं हल मसाइल क़ौम के
आओ मिलकर अम्न की हम इक दुआ रोशन करें

हो गए गर दूर रिश्ते कल तलक जो पास थे
तो बहाली के लिए इक रास्ता रोशन करें

रंज़ो ग़म की भीड़ में कैसे बनाये रास्ते
आप इब्रत लें तो अपना तज़रिबा रोशन करें

आज यकज़हती ज़रूरत है हमारे दौर की
इल्म की शमअ जलाएं मशविरा रोशन करें

रवि शुक्ल

दश्त – जंगल, तज़्किरा – ज़िक्र, मसाइल – समस्याएँ, अम्न – शांति,
इब्रत – किसी को तकलीफ में देखकर होने वाला मानसिक खेद, तज़्रिबा – अनुभव
यक़ज़हती – सहमति,दोस्ती
इल्म – ज्ञान

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