Ghazal Go

आज के ग़ज़ल गो

क्या ज़रूरी है काफिला रखिये – रोहिताश्व मिश्र

पेश है रोहिताश्व मिश्र की एक गज़ल-

क्या ज़रूरी है काफिला रखिये
साथ वालों से राबिता रखिये

हम तो शौक़ीन हैं इबादत के
आपका है ये मयक़दा रखिये

छोटी चौखट है, कोई गिर न पड़े
इसलिए सेह्न में दिया रखिये

आज लाइट है ठीक है लेकिन
राह-ए-कंदील को भी वा रखिए

सिर्फ़ बेदारी ही नहीं काफ़ी
हम सा ग़ाफ़िल भी आश्ना रखिए

काम लीजे हमेशा उल्फ़त से
सर को अपने झुका हुआ रखिए

कोई मेहमान आ ही जाएगा
दिल का दरवाज़ा बस खुला रखिए

तिश्नगी का गुमान टूटेगा,
आप साग़र भरा हुआ रखिये

तिश्नगी का गुमान टूटेगा,
आप साग़र भरा हुआ रखिये

रोहिताश्व मिश्रा

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