Ghazal Go

आज के ग़ज़ल गो

चाँद के माथे पे अब नाम तुम्हारा लिख दूँ – अर्पित शर्मा ‘अर्पित’

नाम तुम्हारा लिख दूँ

पेश है ग़ज़ल गो अर्पित शर्मा की एक गज़ल-

चाँद के माथे पे अब नाम तुम्हारा लिख दूँ     
तुम इजाज़त दो तो तुमको भी हमारा लिख दूँ     

बेसहारो का अगर तुझको सहारा लिख दूँ,   
ये तो ऐसा है कि जुगनू को सितारा लिख दूँ  

एक मुद्दत से जो हर लम्हा मेरे साथ रहा,       
अब तो वो भी यही चाहता है किनारा लिख दूँ,

चाँद अच्छा भी है रोशन भी है चमकीला भी,
उसकी महराब पे मैं नाम तुम्हारा लिख दूँ  

ज़िन्दगी ने मुझे मोहलत ही नहीं दी इतनी,  
तुझको बाहों में भरूँ जान से प्यारा लिख दूँ

अर्पित शर्मा “अर्पित”

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