OBO Live Tarahi-100/Dinesh Kumar

OBO Live Tarahi-100/Dinesh Kumar

OBO Live Tarahi-100/Dinesh Kumar में पढ़िये कैथल, हरियाणा के शाइर दिनेश कुमार बंसल की ग़ज़ल। दिनेश कुमार बंसल प्रतिभाशाली ग़ज़लकार हैं, उनकी ग़ज़लों में शिल्प की कसावट तो है ही कहन में भी गहराई है।
पेश है-

आसमाँ से गिरा गया है मुझे

OBO Tarahi 100/Dinesh Kumar

आसमाँ से गिरा गया है मुझे
मेरा अभिमान खा गया है मुझे

शुक्र है! आइना दिखा कर वो
मेरी कमियाँ बता गया है मुझे

कर के वादा तेरा मुकर जाना
दुनियादारी सिखा गया है मुझे

मैं हूँ आवाज़ आपके दिल की
ग़ौर से कब सुना गया है मुझे

अश्क पीना भी सीख ही लूँगा
“सब्र करना तो आ गया है मुझे”

मुझमें शुहरत की चाह बाक़ी है
क्यों कलन्दर कहा गया है मुझे

कर के तारीफ़ वो मेरी झूठी
ज़हर धीमा चटा गया है मुझे

-दिनेश कुमार

दिनेश कुमार बंसल जी की यह ग़ज़ल ओबीओ डॉट कॉम से ली गई है

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