OBO Live Tarahi-100/Mahendra Kumar
महेन्द्र कुमार

OBO Live Tarahi-100/Mahendra Kumar

बोलना जब से आ गया है मुझे

OBO Live Tarahi-100 में पेश है महेन्द्र कुमार की ग़ज़ल जो उन्होंने ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम में आयोजित लाइव तरही मुशायरे के 100 वें अंक में प्रस्तुत की थी।

OBO Live Tarahi-100/Mahendra Kumar

बोलना जब से आ गया है मुझे
चुप रहूँ ये कहा गया है मुझे

मेरी सूरत बिगाड़ने वाला
आइना कल दिखा गया है मुझे

धोका, रुसवाई, दर्द, तन्हाई
चाहा क्या, क्या दिया गया है मुझे

सहरा-सहरा भटक रहा हूँ अब
इश्क़ पागल बना गया है मुझे

वक़्त का आज फिर कोई लम्हा
आँसुओं में डुबा गया है मुझे

जाना तो मुझको चाहिए था मगर
छोड़ कर वो चला गया है मुझे

जो कहानी कहीं पे ख़त्म न हो
इश्क़ है वो बता गया है मुझे

फल मिलेगा न जाने कब देखो
“सब्र करना तो आ गया है मुझे”

उसने मुझको कभी पढ़ा ही नहीं
जिसकी ख़ातिर लिखा गया है मुझे

कोई मुझको समझ न पाएगा
इतना आसाँ बना गया है मुझे

सहरा-सहरा भटक रहा हूँ अब
इश्क़ पागल बना गया है मुझे

महेन्द्र कुमार

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