राणा प्रताप सिंह

OBO Live Tarahi-100/Rana Pratap Singh

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OBO Live Tarahi-100 में पेश है ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम के प्रबंधन सदस्य श्री राणा प्रताप सिंह जी की ग़ज़ल राज़-ए-उलफ़त बता गया है मुझेओबीओ लाइव तरही मुशायरे को लगातार आठ वर्षों तक संचालित करने और 100 सफल अंकों तक लाने का श्रेय आयोजन के संचालक श्री राणा प्रताप सिंह जी को जाता है। भारतीय वायुसेना में अधिकारी के पद पर कार्य कर रहे राणा साहिब ने मस्रूफ़ियत के बावजूद इस आयोजन को कभी कमज़ोर नहीं होने दिया। आप खुद एक आला दर्ज़े के ग़ज़लकार हैं जो लगातार ग़ज़लों पर मेहनत कर रहे हैं। दूसरे ग़ज़लकारों को प्रोत्साहित करने में राणा साहिब सदा आगे रहे हैं। आपने दो साझा ग़ज़ल संग्रह गज़ल के फलक पर-1 और गज़ल प्रसंग का संपादन भी किया है जिसमें कुल 100 गज़लकारों की ग़ज़ले संकलित की गई हैं।

राज़-ए-उलफ़त बता गया है मुझे

OBO Tarahi 100 Rana Pratap Singh

राज़-ए-उलफ़त बता गया है मुझे
कितना आसाँ बना गया है मुझे

इस कहानी में तुम मिलोगे कहीं
सिर्फ इतना कहा गया है मुझे

लुत्फ़-ए-सोज़-ए-जिगर की ख्वाहिश में
देख, कितना जला गया है मुझे?

मसअला ये नहीं कि मैं गुम था
मसअला ये कि पा गया है मुझे

मुझको बेदख़्ल करके मुझसे ही
अपनी धुन में लगा गया है मुझे

इश्क में सिर्फ इश्क होता है
बात इतनी बता गया है मुझे

कल छुड़ाई थी उसने दे के कसम
आज फिर से पिला गया है मुझे

तेरी बेताबियों की सुहबत में
“सब्र करना तो आ गया है मुझे”

दिन ब दिन मैं रहा सवालों में
और वो जांचता गया है मुझे

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