Saman Kabeer
समर कबीर

OBO Live Tarahi-100/Samar Kabeer

OBO Live Tarahi-100/Samar Kabeer

OBO Live Tarahi-100 शीर्षक से पोस्ट होने वाली गज़लें ओबीओ डॉट कॉम से ली गई हैं। पिछले आठ वर्षों से अधिक समय से ओपन बुक्स ऑनलाइन द्वारा अनवरत आयोजित किया जाना वाला ओबीओ लाइव तरही मुशायरा हाल ही में अपने आयोजन के सौ अंक पूरे कर चुका है। इंटरनेट पर शायद ही ऐसा कोई आयोजन होगा जिसने ऐसा मील का पत्थर स्थापित किया हो। गज़ल-गो डॉट कॉम की तरफ से समस्त ओबीओ टीम को बधाई।
ग़ज़ल गो डॉट कॉम पर इस आयोजन की चयनित ग़ज़लें पोस्ट की जा रही है, जिसे सोशल मीडिया के माध्यम से पाठकों तक पहुँचाया जाएगा।
पहली ग़ज़ल मोहतरम समर कबीर साहिब की है। यह तरही मुशायरा ओबीओ के सबसे सक्रिय सदस्य और उज्जैन के उस्ताद शाइर मोहतरम समर कबीर साहिब के ही मिसरे “सब्र करना तो आ गया है मुझे” पर आधारित है।

 -शिज्जु शकूर

बीओ रास आ गया है मुझे
Saman Kabeer

बीओ रास आ गया है मुझे
थ वफ़ा का दिखा गया है मुझे

ष्ट ऐसे ही सबको होना है
बुलबुला ये बता गया है मुझे

क्या भरोसा करूँ किसी पर मैं
बके हाथों छला गया है मुझे

ज शैताँ के जाल में फँस कर
फ़्स पत्थर बना गया है मुझे

लाके महबूब की गली में “समर”
श्क़ क्या क्या दिखा गया है मुझे

म हैं आँखे तो क्या हुआ यारो
“सब्र” करना तो आ गया है मुझे”

-समर कबीर

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