OBO Live Tarahi 100, Yograj Prabhakar
योगराज प्रभाकर

OBO Live Tarahi-100/Yograj Prabhakar

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OBO Live Tarahi-100 में पेश है श्री योगराज प्रभाकर जी की एक ग़ज़ल तिश्नगी से मिला गया है मुझे।
पिछले आठ वर्षों से अधिक समय से ओपन बुक्स ऑनलाइन द्वारा अनवरत आयोजित किया जाना वाला ओबीओ लाइव तरही मुशायरा हाल ही में अपने आयोजन के सौ अंक पूरे कर चुका है। इंटरनेट पर शायद ही ऐसा कोई आयोजन होगा जिसने ऐसा मील का पत्थर स्थापित किया हो। गज़ल-गो डॉट कॉम की तरफ से समस्त ओबीओ टीम को बधाई।

तिश्नगी से मिला गया है मुझे

OBO Live Tarahi 100, Yograj Prabhakar

तिश्नगी से मिला गया है मुझे
जाम ऐसा दिया गया है मुझे

ख़्वाब झूठे दिखा गया है मुझे
इस तरह से ठगा गया है मुझे

चुप न रहता तो और क्या करता
तू बता कब सुना गया है मुझे

चाँद अब मुझसे खार खाएगा
क्यों तू जुगनू बता गया है मुझे

देख पाऊँ न सुन सकूँ कुछ भी
गो अदालत कहा गया है मुझे

इक दफ़ा तो तू गुनगुना मुझको
तेरी ख़ातिर लिखा गया है मुझे

डाँट के साथ प्यार बेटी का
याद माँ की दिला गया है मुझे

ज़ुल्म सहना भी आ ही जाएगा
सब्र करना तो आ गया है मुझे

योगराज प्रभाकर

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1 Comment

  1. Kapil Dev Shastri says:

    बेहतरीन ग़ज़ल। डाँट के साथ प्यार बेटी का
    याद माँ की दिला गया है मुझे

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