ओबीओ लाइव तरही-100/अजीत शर्मा ‘आकाश’

पेश है ओबीओ लाइव तरही-100 में इलाहाबाद के शाइर श्री अजीत शर्मा ‘आकाश’ की गज़ल

लम्हा-लम्हा छला गया है मुझे

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लम्हा-लम्हा छला गया है मुझे
सिर्फ़ झाँसा दिया गया है मुझे

रात से डर के डूब जाता है
फिर से सूरज बता गया है मुझे

मैं भटक जाता, दोस्त कोई मगर
राहे-मंज़िल बता गया है मुझे

क़त्ल करने की दे के धमकी वो
आज फिर से डरा गया है मुझे

ये नहीं करना, वो नहीं करना
कोई समझा-बुझा गया है मुझे

मेरी आँखों को बख़्श कर सूरज
कोई अन्धा बना गया है मुझे

चाहे जो भी हो मुतमईन हूँ मैं
सब्र करना तो आ गया है मुझे

जीत ‘आकाश’ फिर दिलाकर वो
आज फिर से हरा गया है मुझे

मेरी आँखों को बख़्श कर सूरज
कोई अन्धा बना गया है मुझे

अजीत शर्मा आकाश

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