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अंजलि गुप्ता 'सिफ़र'

ओबीओ लाइव तरही 100 – अंजलि गुप्ता ‘सिफ़र’

अम्बाला की शायरा अंजलि गुप्ता ‘सिफ़र’ की पहचान लघुकथाकार के रूप में भी है। हाल ही में विभिन्न पत्रिकाओं और साझा संकलन में आपकी रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं। ओबीओ लाइव तरही 100 में पेश है अंजलि गुप्ता ‘सिफ़र’ जी की ग़ज़ल-

छोड़ कर जो चला गया है मुझे

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छोड़ कर जो चला गया है मुझे
ख़्वाब कितने दिखा गया है मुझे

ख़त पुराना वो आज दिखलाकर
ज़ख्म देकर नया गया है मुझे

कहकहे बन गए मेरे आँसू
कोई इतना रुला गया है मुझे

ज़िन्दगी तू मुझे मना न मना
रूठना तुझसे आ गया है मुझे

अब किसी शय से डर नहीं लगता
वक़्त इतना सिखा गया है मुझे

फूल से माँगी क्या ज़रा ख़ुशबू
देखो कासा थमा गया है मुझे

सीख कर आज ज़िंदगी का सबक
सब्र करना तो आ गया है मुझे

अपने दम पर ही जगमगाओ ‘सिफ़र’
एक जुगनू सिखा गया है मुझे

कहकहे बन गए मेरे आँसू
कोई इतना रुला गया है मुझे

अंजलि गुप्ता ‘सिफ़र’ 

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