OBO|Live Tarahi|Ghazal|Dilbag Virk|Ghazal-go
दिलबाग सिंह विर्क

ओबीओ लाइव तरही-100/दिलबाग विर्क

पेश है ओबीओ लाइव तरही-100 में हरियाणा के शाइर श्री दिलबाग सिंह विर्क जी की गज़ल-

राह से वो हटा गया है मुझे

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राह से वो हटा गया है मुझे
तोड़ कसमें, भुला गया है मुझे

यूँ ही उड़ता रहा, हवा में मैं
आइना वो दिखा गया है मुझे

रोजो-शब उसको सोचता हूँ बस
रोग कैसा लगा गया है मुझे

ज़िन्दगी का तराना गाता हूँ
दर्द का साज़ भा गया है मुझे

वक्त की ठोकरों में रह रह कर
सब्र करना तो आ गया है मुझे

इश्क का रोग ‘विर्क’ ऐसा लगा
अश्क़ पीना सिखा गया है मुझे

ज़िन्दगी का तराना गाता हूँ
दर्द का साज़ भा गया है मुझे

-दिलबाग सिंह विर्क

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