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मुनव्वर अली ताज

ओबीओ लाइव तरही-100/मुनव्वर अली ताज

पेश है ओबीओ लाइव तरही-100 में मोहतरम मुनव्वर अली ताज की ग़ज़ल

यार करके जुदा गया है मुझे

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यार करके जुदा गया है मुझे
याद का घुन लगा गया है मुझे

वो सलीक़ा सिखा गया है मुझे
घोलकर ग़म पिला गया है मुझे

ज़ख़्म ऐसा दिया गया है मुझे
दर्द कच्चा चबा गया है मुझे

सुन के खुश हो गये अदू मेरे
कुछ तो ऐसा कहा गया है मुझे

चाँद आकर मेरे ख़्यालों में
आप बीती सुना गया है मुझे

बेरुख़ी से मुझे जलाकर वो
आँसुओं से बुझा गया है मुझे

हो गया है सितम पे वो नादिम
उसका बदलाव भा गया है मुझे

चाहतों की तलाश में ज़ालिम
तुहमतों में दबा गया है मुझे

इश्क़ का वास्ता मुझे देकर
हुस्न चूना लगा गया है मुझे

‘ताज’ निकला था ढूँढने देखो
कुछ किताबों में पा गया है मुझे

शुक्र करना भी आएगा मुझको
“सब्र करना तो आ गया है मुझे”

बेरुख़ी से मुझे जलाकर वो
आँसुओं से बुझा गया है मुझे

-मुनव्वर अली ‘ताज’

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