ओबीओ लाइव तरही 100 – याद फिर कोई/समर कबीर

पेश है ओबीओ लाइव तरही-100 में उज्जैन की उस्ताद शाइर मोहतरम समर कबीर साहिब की गज़ल। ओबीओ तरही मुशायरे का 100वाँ अंक आपके ही मिसरे पर आधारित है।

याद फिर कोई आ गया है मुझे

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याद फिर कोई आ गया है मुझे
ख़ूँ के आँसू रुला गया है मुझे

ये भी ऐज़ाज़ कम नहीं यारो
पास दिल के रखा गया है मुझे

ज़िन्दगी थी तो साथ ग़म भी था
अब तो आराम आ गया है मुझे

आके हुजरे में एक शब कोई
ख़ुशबुओं में बसा गया है मुझे

वक़्त जब इम्तिहान का आया
छोड़ कर वो चला गया है मुझे

कोई मेरे सिवा न था उसमें
खोल कर दिल दिखा गया है मुझे

कहते कहते वो यार जग बीती
आप बीती सुना गया है मुझे

है ये मिसरा सभी के होटों पर
“सब्र करना तो आ गया है मुझे”

आफ़ियत है इसी में मेरी ‘समर’
वो करूँ, जो कहा गया है मुझे

ये भी ऐज़ाज़ कम नहीं यारो
पास दिल के रखा गया है मुझे

समर कबीर

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