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योगराज प्रभाकर

ओबीओ लाइव तरही 100 – जब तुम्हारा लिखा गया/योगराज प्रभाकर

ओबीओ लाइव तरही 100 में पेश है पटियाला के रचनाकार ओबीओ के प्रधान संपादक व लघुकथा पर आधारित पत्रिका लघुकथा कलश के संपादक श्री योगराज प्रभाकर जी की दूसरी ग़ज़ल-

जब तुम्हारा लिखा गया है मुझे

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जब तुम्हारा लिखा गया है मुझे,
तब हसद से पढ़ा गया है मुझे

मैं ज़मीं से जुड़ा रहा हूँ सदा,
तब ही परबत कहा गया है मुझे

आसमाँ नापने की ख्वाहिश थी,
ये कफ़स क्यों दिया गया है मुझे

ख़ैर मक़दम है दौरे गर्दिश का,
जिसकी ख़ातिर चुना गया है मुझे

रूह में ख़ार उग पड़े लाखों,
किस नज़र से छुआ गया है मुझे

रंजो ग़म क्या बिगाड़ पाएगा,
सब्र करना तो आ गया है मुझे

रूह में ख़ार उग पड़े लाखों,
किस नज़र से छुआ गया है मुझे

योगराज प्रभाकर

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