Ghazal, Ghazal go, Saarthi, Love Poetry, Intezar
बैद्यनाथ 'सारथी'

इन्तिज़ार इन्तिज़ार है तो है – सारथी

इन्तिज़ार इन्तिज़ार है तो है पटना के बैद्यनाथ सारथी ग़ज़लकारों की इस पीढ़ी के सशक्त और प्रतिभाशाली रचनाकार हैं। उन्हें अपनी रचनाओं को सहेजना और सँभालना आता है। किसी भी ग़ज़ल में बहर का आकार या अशआर की तादाद तासीर तय नहीं करती। बल्कि कहन की मजबूती भी ग़ज़ल का मेआर तय करती है। सारथी …

Ghazal-go, Muntazir Firozabaadi, Kalaam
मुन्तज़िर फ़िरोज़ाबादी

वक़्ते-क़याम और भी कुछ तो हो सकता था – मुन्तज़िर फ़िरोज़ाबादी

वक़्ते-क़याम और भी कुछ तो हो सकता था मुन्तज़िर साहब उन ग़ज़ल-गो की राह पर हैं, जिनकी ग़ज़लें परम्परा और आधुनिकता के बीच पुल की तरह हैं। शायरी में पारम्परिक लहजे की लचक बरकरार रखते हुए नए समय की बातें करना आसान नहीं होता। इसी मुश्किल काम को अंजाम दे रहे हैं ये। एक मेआरी …

Ghazal, Aarti Kumari, Love Poetry
डॉ आरती कुमारी

आप तो रिश्तों में भी चालाकियाँ करते रहे – डॉ. आरती

आप तो रिश्तों में भी चालाकियाँ करते रहे मुज़फ़्फ़पुर(बिहार) निवासी डॉ. श्रीमती आरती कुमारी एक आला दर्ज़े की शायरा हैं। उनकी ग़ज़लों में शिल्प की कसावट तो है ही कहन भी सार्थक है। ग़ज़ल सिर्फ शब्दों को बहर में सजाने का नाम नहीं है। ग़ज़ल तब मुकम्मल(पूर्ण) होती है जब दो मिसरों के बीच जो …

Ashok Anjum, Ghazal, Bahre Mir
अशोक अंजुम

खाना-पीना, हंसी-ठिठोली, सारा कारोबार अलग – अशोक अंजुम

खाना-पीना, हंसी-ठिठोली, सारा कारोबार अलग अशोक अंजुम जी की ग़ज़लों का अपना अलग ही लुत्फ़ है। भाषा और कहन के हवाले से उनकी हर ग़ज़ल में एक नयापन झलकता है। पहले इक छत के ही नीचे कितने उत्सव होते थे, सारी खुशियाँ पता न था यूँ कर देगा बाज़ार अलग, इस शे’र को ही देखिए, …

Giriraj Bhandari, Ghazal, Zindagi
गिरिराज भंडारी

है तर्कों की कहाँ हद जानता हूँ – गिरिराज भंडारी

है तर्कों की कहाँ हद जानता हूँ गिरिराज भंडारी जी की ग़ज़ल हमेशा सच्चाई के करीब होती है। तर्कों कहाँ हद जानता हूँ में उनका अनुभव और लोगों को देखने का नज़रिया दिखाई देता है। करें आकाश को छूने के जो दावे, मैं उनका मक़सद जानता हूँ इस शेर में उनके अनुभव की झलक दिखाई …

समर कबीर

मुंह देखते हैं मेरा हुनर देखते नहीं – समर कबीर

मुंह देखते हैं मेरा हुनर देखते नहीं समर कबीर साहिब का तज़्रबा, ग़ज़ल के साथ-साथ उर्दू में उनकी पकड़ बतौर शाइर उन्हें विशिष्ट पहचान देते हैं। इसी ग़ज़ल में देखिए उन्होंने क्या कमाल के अशआर कहे हैं। अंजान बनके पूछ रहे हो कि क्या हुआ, अखबार में छपी है खबर देखते नहीं  अपना बनने वाले …

Ghazal, Siyasat, Ravi Shukla
रवि शुक्ल

हमें न ख़्वाब दिखाओ चुनाव के दिन हैं – रवि शुक्ल

हमें न ख़्वाब दिखाओ चुनाव के दिन हैं रवि शुक्ल जी बेहद संजीदा ग़ज़लकार हैं। उनकी संजीदगी देखिए इस तंज़िया गज़ल में भी खूब नज़र आई है। चुनाव और राजनीति में कई ग़ज़लें कही गई हैं लेकिन रवि साहिब का लहज़ा बिल्कुल जुदा है। इस शे’र को देखिए जो चल रहे हैं ज़माने में ले …

Urdu Ghazal, Latest Poetry, Samar Kabeer
समर कबीर

समझा समझा कर हरजाई थक गया मैं – समर कबीर

समझा समझा कर हरजाई थक गया मैं समर कबीर साहिब  उस्ताद का दर्जा रखते हैं और वे ग़ज़ल की शिल्प के प्रति सजग शाइर  हैं । इस दौर के दूसरे शाइरों से भी वे उम्मीद करते हैं कि वे शिल्प और शब्दों के प्रयोग के प्रति सचेत रहें। सच ही तो है ग़ज़लगोई इतनी आसान …

Hindi Ghazal, Latest Poetry, 4 Women
सोनिया वर्मा

डर रहा है अब जहाँ अनुपात का दर देखकर – सोनिया वर्मा

डर रहा है अब जहाँ अनुपात का दर देखकर सोनिया वर्मा रायपुर(छत्तीसगढ़) की शायरा हैं। उनकी इस ग़ज़ल में बेटियों का दर्द, उनकी मनःस्थिति बखूबी बयाँ  हुई हैं। और यही आज की सच्चाई भी है। एक तरफ शायरा लोगों की दबी मानसिकता के प्रति आगाह करती हैं। दूसरी तरफ वही असमंजस की स्थिति मे नज़र …

Hindi Ghazal, Latest Poetry
गिरिराज भंडारी

धारणाएँ हों मुखर, तो चुप रहें – गिरिराज भंडारी

धारणाएँ हों मुखर, तो चुप रहें गिरिराज भंडारी उस शख़्सियत का नाम है जिन्होंने रिटायरमेंट की उम्र में ग़ज़ल सीखना शुरू किया। उनके अंदर सीखने की तीव्र ललक थी। और शिल्प के प्रति सचेत इतने कि यदि किसी ने इस्लाह बताई तो निस्संकोच स्वीकार कर लेते हैं। लेकिन ग़ज़ल के शिल्प और शब्दों के प्रयोग …