अमित वागर्थ

बुझे चराग़ को फ़िर-फिर जला रहा हूँ मैं – अमित वागर्थ

बुझे चराग़ को फ़िर-फिर जला रहा हूँ मैं इलाहाबाद के शाइर अमित वागर्थ इलाहाबाद विश्वविद्यालय में सीनियर रिसर्च फेलो रहे हैं। अभी हाल ही में आपका चयन हरियाणा लोक सेवा आयोग से असिस्टेंट प्रोफ़ेसर (हिंदी) के पद पर हुआ है। अमित वागर्थ जी एक प्रतिभाशाली शाइर हैं। उनकी यह ग़ज़ल बहर 1212 1122 1212 22 …

राज़िक अंसारी

हमारे दिल में रह कर थक न जाएँ – राज़िक़ अंसारी

हमारे दिल में रह कर थक न जाएँ Humare Dil, Ghazal, Razique Ansari, हमारे दिल में रहकर वरिष्ठ शाइर जनाब  राज़िक़ अंसारी साहिब की एक खूबसूरत गज़ल है। बहर 1222 1222 122 में लिखी गई है, इस ग़ज़ल का लुत्फ लें और प्रतिक्रिया भी ज़रूर दें। हमारे दिल में रह कर थक न जाएँ तुम्हारे …

उर्दू साहित्य की महान शख्सियत

टॉप 10 शेर – निदा फाज़्ली : उर्दू साहित्य की महान शख़्सियत

Top 10 Sher Nida Fazli टॉप 10 शेर, निदा फ़ाज़्ली साहिब के। उर्दू साहित्य की महान शख्सियत। निदा फ़ाज़्ली साहिब बरसों तक गज़ल की दुनिया में सक्रिय थे। उन्होंने फिल्मों के लिए भी कई यादगार गीत और ग़ज़लों की रचना की थी। फिल्मों में काम करने के बावजूद उन्होंने अपनी मौलिकता बरकरार रखी थी। निदा …

शरदिंदु मुखर्जी

पुस्तक समीक्षा : पृथ्वी के छोर पर, लेखक – शरदिंदु मुखर्जी

पृथ्वी के छोर पर: अंटार्कटिका का सर्द एवं रोमांचक अहसास “अंटार्कटिका के वैज्ञानिक तथ्यों से इसे बोझिल बनाना मैंने उचित नहीं समझा। उसके लिए पाठक को बहुतेरे प्रामाणिक और उत्कृष्ट ग्रंथ उपलब्ध कराए जा सकते हैं।“ लेखक श्री शरदिंदु मुखर्जी जी द्वारा लिखी गयी किताब पृथ्वी के छोर पर का पूरा सार के इन शब्दों …

रोहिताश्व मिश्र

वक़्त आने पे किधर से भी निकल जाऊँगा – रोहिताश्व मिश्र

वक़्त आने पे किधर, ग़ज़ल, रोहिताश्व मिश्रा बहर 2122 1122 1122 22 बहर पर कही गई वक़्त आने पे किधर, ग़ज़ल, रोहिताश्व मिश्रा जी की एक खूबसूरत ग़ज़ल है। रोहिताश्व मिश्रा एक प्रतिभाशाली ग़ज़ल गो हैं, जो साथी ग़ज़ल गो और ग़ज़ल प्रेमियों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। खूबसूरत अशआर से सजी इस ग़ज़ल को …

समीर परिमल

एक मुट्ठी आसमाँ बाक़ी रहा – समीर परिमल

एक मुट्ठी आसमाँ बाक़ी रहा, ग़ज़ल, समीर परिमल बहर 2122 2122 212 पर कही गई एक मुट्ठी आसमाँ बाक़ी रहा, ग़ज़ल, समीर परिमल साहिब की बेहतरीन गज़लों में से है। बेहतरीन रवानी, लाजवाब कहन और सधे हुए शिल्प का बेमिसाल उदाहरण है समीर परिमल साहिब की यह गज़ल। एक मुट्ठी आसमाँ बाक़ी रहा हौसलों का कारवाँ …

संजू शब्दिता

अब्र ने चाँद की हिफ़ाजत की – संजू शब्दिता

अब्र ने चाँद की हिफ़ाजत की संजू शब्दिता इलाहाबाद की एक प्रतिभाशाली शायरा हैं। उनकी प्रतिभा की झलक इस ग़ज़ल में नज़र आ जाती है। खूबसूरत मतले से शुरूअ होकर आखिरी शे’र तक संजू शब्दिता ने अपनी छाप छोड़ी है। यह ग़ज़ल उन्होंने बहर 2122 1212 22 पर कही है। अब्र ने चाँद की हिफ़ाजत …

Poetry | Harish Darvesh | Basti,| UP
हरीश दरवेश

महँगा लिबास कार पे माला गुलाब की – हरीश दरवेश

महँगा लिबास कार पे माला गुलाब की यह ग़ज़ल श्री हरीश दरवेश साहब की जदीद ग़ज़लों में से एक है। श्री हरीश दरवेश जी उत्तर प्रदेश के बस्ती नामक जगह से आते हैं। जनाब हरीश दरवेश साहब ने अदम गोंडवी और दुष्यंत कुमार जैसे गज़लकारों की परंपरा को आगे बढ़ाया है। यह उनकी ग़ज़ल में …

samra
समर कबीर

समरा : शायर – समर कबीर

समरा: वारिस-ए-क़मर का सरमाया मोहतरम जनाब समर कबीर साहब के वालिद मरहूम जनाब क़मर साहब एक आला दर्ज़े के शायर थे; यानि ग़ज़लगोई जनाब समर कबीर साहब के खून में है और उनकी ग़ज़ल का हर शे’र इस बात की तस्दीक़ भी करता है। समरा- एक सौ बारह पृष्ठ, तक़रीबन सौ ग़ज़लें; फ़क़त इतना ही …

निलेश 'नूर'

दिल के ज़ख्मों से उठी जब से गुलाबी ख़ुशबू – निलेश नूर

दिल के ज़ख्मों से उठी जब से गुलाबी ख़ुशबू “दिल के ज़ख्मों से उठी जब से गुलाबी ख़ुशबू” निलेश नूर भाई की यह ग़ज़ल सबसे पहले मैंने ओबीओ पर पढ़ी थी।  बेहद मुश्किल रदीफ को  उन्होंने बड़ी आसानी से निभाया है। बहर 2122 1122 1122 22 पर  लिखी इस ग़ज़ल का हर शे’र मानीख़ेज़ है। ग़ज़ल …